गलगोटिया यूनिवर्सिटी के झूठे दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को किया शर्मसार

विनोद कुमार वरिष्ठ पत्रकार

Saturday, February 21, 2026 - 15:07
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गलगोटिया यूनिवर्सिटी के झूठे दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को किया शर्मसार

नई दिल्ली (आरएनआई) भारत को एआई का वैश्विक केंद्र बनाने के उद्देश्य से आयोजित 'इण्डिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' एक विवाद के कारण अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। 

ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा एक चीनी रोबोटिक डॉग को अपना "इन-हाउस नवाचार" बताकर प्रदर्शित करने की घटना ने न केवल देश में, बल्कि विदेशी मीडिया और वैश्विक टेक दिग्गजों के बीच भी भारत की तकनीकी साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दुनिया के प्रतिष्ठित अखबारों और समाचार एजेंसियों ने इस घटना को भारत की एआई महत्वाकांक्षाओं के लिए एक "बड़ी शर्मिंदगी" करार दिया है।न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट जैसे अमेरिकी अखबारों ने लिखा कि जब भारत खुद को एक "एआई पावरहाउस" के रूप में पेश कर रहा है, तब एक प्रमुख शिखर सम्मेलन में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध चीनी उत्पाद को स्वदेशी बताकर पेश करना देश की विश्वसनीयता को चोट पहुँचाता है।

ब्रिटेन के अखबार द गार्डियन ने इसे "अजीब और अनैतिक" मोड़ बताते हुए लिखा कि कैसे सोशल मीडिया के जागरूक नागरिकों ने $1,600 के चीनी मॉडल 'Unitree Go2' की तुरंत पहचान कर ली, जबकि यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर इसे अपना आविष्कार बता रही थीं।

रूस की समाचार एजेंसी तास ने इसे एक "गंभीर संगठनात्मक चूक" बताया, जिसने समिट की गरिमा को नुकसान पहुँचाया।चीन के ग्लोबल टाइम्स ने इस पर व्यंग्य करते हुए इसे "असफल री-ब्रांडिंग" कहा और दावा किया कि भारत नकल तो कर सकता है, लेकिन नवाचार के मामले में अभी चीन से कोसों पीछे है।

यहीं नहीं एआई समिट में शामिल Google, Microsoft और NVIDIA जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी इस पर चिंता जताई है। गूगल के अधिकारियों के अनुसार, "एआई इकोसिस्टम भरोसे पर टिका है और ऐसी घटनाएं 'एथिकल एआई' के लक्ष्यों को पीछे धकेलती हैं।" वहीं, माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया के विशेषज्ञों ने इसे "इंजीनियरिंग एथिक्स" का उल्लंघन बताते हुए कहा कि मौजूदा हार्डवेयर का उपयोग करना गलत नहीं है, लेकिन उसे अपना आविष्कार बताना तकनीकी ईमानदारी के खिलाफ है।

यह मामला तब तूल पकड़ा जब सोशल साइट एक्स (X)पर नेटिज़न्स ने रोबोट के वीडियो में चीनी कंपनी 'Unitree' की ब्रांडिंग को पहचान लिया। इसके बाद यूनिवर्सिटी को शिखर सम्मेलन से बाहर कर दिया गया। बढ़ते दबाव के बीच, गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए इसे "संवाद की कमी" और "अल्पज्ञानी प्रतिनिधि" का मामला बताया और माफी मांगी है।

विशेषज्ञों का मानना है,कि यह घटना केवल एक विश्वविद्यालय की चूक नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के 'मेक इन इंडिया' और 'स्वदेशी शोध' के दावों पर संदेह पैदा करती है। फ्रांस के राष्ट्रपति और कई देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुई इस घटना ने भविष्य के आयोजनों में सख्त 'वेरिफिकेशन प्रोटोकॉल' की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

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