‘बढ़ती सांप्रदायिक घटनाएं बेहद चिंताजनक’, बांसवाड़ा हिंसा पर ओवैसी सख्त, कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
हैदराबाद (आरएनआई) तेलंगाना के बांसवाड़ा में हुई हिंसा को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राज्य में लगातार सामने आ रही सांप्रदायिक घटनाओं को “बहुत चिंताजनक” बताते हुए सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। ओवैसी ने इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि बांसवाड़ा में हुई हिंसा के दौरान दक्षिणपंथी भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय की दुकानों और रेहड़ी-पटरी वालों को जानबूझकर निशाना बनाया। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि अपराध हुआ है तो दोषियों के खिलाफ बिना भेदभाव के सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
एआईएमआईएम प्रमुख ने बताया कि उन्होंने कामारेड्डी के पुलिस अधीक्षक से फोन पर बात कर घटना की जानकारी ली। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कुछ ही घंटों में इतनी बड़ी भीड़ कैसे इकट्ठा हो गई। ओवैसी के अनुसार, सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें कथित हमलावरों की गतिविधियां साफ दिखाई दे रही हैं। उन्होंने कहा कि इन वीडियो के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
जानकारी के अनुसार, एक मॉल में धार्मिक गीत बजाने को लेकर दो समूहों के बीच विवाद शुरू हुआ था। एक व्यक्ति द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद बहस बढ़ी और मामला पथराव तक पहुंच गया। इस हिंसक झड़प में एक पुलिस कांस्टेबल समेत कई लोग घायल हुए। पुलिस ने अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया है और इलाके में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।
ओवैसी ने हिंसा में जिन लोगों की दुकानों और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, उन्हें सरकार द्वारा मुआवजा दिए जाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि वह कामारेड्डी जिला एआईएमआईएम के महासचिव सईद खान के संपर्क में हैं और नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। ओवैसी ने भरोसा दिलाया कि एआईएमआईएम पीड़ितों को हर संभव मदद और राहत उपलब्ध कराएगी।
इसके साथ ही ओवैसी ने सदाशिवपेट में मस्जिद-ए-मौलाना को तोड़े जाने के मामले पर भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन मालिक मोहम्मद कलीम को लंबे समय से परेशान किया जा रहा था। राजस्व विभाग का कहना है कि जमीन ‘इनाम’ श्रेणी की थी, इसलिए ढांचा हटाया गया, लेकिन ओवैसी ने पूछा कि अगर जमीन पर दो वर्षों से कब्जा था और बोरवेल भी खुदा हुआ था, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
बांसवाड़ा हिंसा और मस्जिद तोड़े जाने के मामलों ने तेलंगाना की राजनीति को गरमा दिया है। विपक्षी दल सरकार पर कानून-व्यवस्था में ढिलाई का आरोप लगा रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और राज्य में शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
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