मध्य प्रदेश में वक्फ संपत्तियों पर CAG की रिपोर्ट से खुलासा, 20 जिलों में 33 सरकारी संपत्तियां दर्ज
मध्य प्रदेश (आरएनआई) मध्य प्रदेश में वक्फ संपत्तियों को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 20 जिलों में लगभग 77 करोड़ रुपये मूल्य की 33 ऐसी संपत्तियां पाई गईं, जो राजस्व अभिलेखों में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थीं, लेकिन उन्हें वक्फ बोर्ड की संपत्ति के रूप में पंजीकृत कर दिया गया। इन जिलों में गुना भी शामिल बताया गया है।
कैग ने मप्र वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली का ऑडिट करते हुए कुल 81 संपत्तियों की जांच की। इसमें पाया गया कि करीब 41 प्रतिशत मामलों में दस्तावेजों में दर्ज सरकारी संपत्तियों को वक्फ के नाम पर रजिस्टर्ड कर दिया गया। रिपोर्ट में उल्लेख है कि संबंधित जिलों के कलेक्टरों द्वारा रजिस्ट्री प्रक्रिया को निरस्त कराने या आपत्ति दर्ज करने संबंधी कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किए गए, जिससे स्थिति जटिल बनी रही।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि प्रशासनिक स्तर पर सक्रिय हस्तक्षेप न होने से वक्फ अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन विवादित स्थिति में पहुंच गया। हालांकि, राज्य सरकार ने कैग को दिए अपने जवाब में इसे “तकनीकी त्रुटि” बताया है। सरकार का कहना है कि वक्फ अधिनियम में जिला प्रशासन से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है और स्थानीय प्रशासन को संपत्तियों की जानकारी थी।
मामले ने अब प्रशासनिक जवाबदेही और भूमि अभिलेखों की पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थितियों से बचने के लिए राजस्व रिकॉर्ड और पंजीयन प्रक्रिया में समन्वय और सख्ती आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद न उत्पन्न हो।
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