मथुरा पुलिस और रमनलाल शोरावाला स्कूल संचालक पर गंभीर आरोप, स्टाफ के खिलाफ FIR निकली फर्जी

मथुरा में रमनलाल शोरावाला पब्लिक स्कूल के संचालक अभिषेक गोयल द्वारा दर्ज कराई गई एक FIR की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि मामला फर्जी आधारों पर दर्ज कराया गया था। अभिषेक गोयल ने स्कूल की कर्मचारी मीनू शर्मा, हरीश शर्मा, आराधना श्रीवास्तव, गौरव चतुर्वेदी और शालिनी अग्रवाल पर आरोप लगाया था कि 21 अप्रैल 2025 को वे उनके घर आए, गाली-गलौज की और घर के बाहर खड़ी बाइक ले गए। घटना के पांच महीने बाद, 17 सितंबर 2025 को यह मुकदमा शहर कोतवाली में दर्ज किया गया, जबकि पुलिस ने बिना किसी स्पष्ट सबूत के ही बाइक चोरी और गाली-गलौज के आरोपों में इन पांचों पर मामला लिख दिया।

Tuesday, November 18, 2025 - 15:00
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मथुरा पुलिस और रमनलाल शोरावाला स्कूल संचालक पर गंभीर आरोप, स्टाफ के खिलाफ FIR निकली फर्जी

मथुरा (आरएनआई) मथुरा में रमनलाल शोरावाला पब्लिक स्कूल के संचालक अभिषेक गोयल द्वारा दर्ज कराई गई एक FIR की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि मामला फर्जी आधारों पर दर्ज कराया गया था। अभिषेक गोयल ने स्कूल की कर्मचारी मीनू शर्मा, हरीश शर्मा, आराधना श्रीवास्तव, गौरव चतुर्वेदी और शालिनी अग्रवाल पर आरोप लगाया था कि 21 अप्रैल 2025 को वे उनके घर आए, गाली-गलौज की और घर के बाहर खड़ी बाइक ले गए। घटना के पांच महीने बाद, 17 सितंबर 2025 को यह मुकदमा शहर कोतवाली में दर्ज किया गया, जबकि पुलिस ने बिना किसी स्पष्ट सबूत के ही बाइक चोरी और गाली-गलौज के आरोपों में इन पांचों पर मामला लिख दिया।

जांच होने पर कई दावों का खंडन हो गया। SP सिटी आशना चौधरी द्वारा कराई गई तकनीकी जांच में सभी आरोपियों की मोबाइल लोकेशन घटना स्थल पर नहीं मिली। संचालक के घर में लगे CCTV कैमरों में भी न तो बाइक चोरी का कोई दृश्य मिला और न ही गाली-गलौज की कोई झलक दिखाई दी। सुरक्षा कर्मियों ने भी घटना की पुष्टि नहीं की। इसके बावजूद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया और आरोपियों के अनुसार चौकी से जुड़े दारोगा अरविंद ने उन्हें थाने बुलाकर धमकाया और जेल भेजने की बात कही। इस मामले में झूठी FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया में शामिल होने पर तत्कालीन चौकी प्रभारी अरविंद को SP के सामने पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।

FIR में आरोपी बनाए गए लोगों की स्वास्थ्य स्थिति भी घटना को संदिग्ध बनाती है। आराधना रीढ़ की हड्डी की मरीज हैं, शालिनी कैंसर पीड़ित हैं और हरीश ब्रेन स्ट्रोक से उबर रहे हैं। इनका कहना है कि इन परिस्थितियों में किसी घटना में शामिल होना उनके लिए संभव ही नहीं था।

इन पांचों आरोपियों में से मीनू शर्मा ने बताया कि कथित घटना वाले दिन वह स्कूल में मौजूद थीं और स्वयं डायरेक्टर अभिषेक गोयल ने ही उन्हें 10 दिन की छुट्टी पर भेजने का पत्र दिया था। उनके अनुसार बाकी चारों अपने घरों पर थे, जो मोबाइल लोकेशन से साबित हुआ। उन्होंने SP आशना चौधरी का धन्यवाद किया कि उन्होंने उनकी बात सुनी और फर्जी मुकदमे से राहत दिलाई। बातचीत के दौरान मीनू शर्मा ने स्कूल के वातावरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि प्रभात भाटी, हिमेश सारस्वत और आरके शर्मा जैसे कर्मचारी छात्राओं के प्रति अनुचित नजर रखते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अभिषेक गोयल के पिता वीरेंद्र गोयल ने पन्ना पोखर चौकी इंचार्ज राहुल चौधरी के सामने उन्हें गोली मारने की धमकी तक दे दी और पुलिस मूक दर्शक बनी रही।

पूर्व शिक्षक गौरव चतुर्वेदी ने भी स्कूल की व्यवस्था और प्रबंधन पर आरोप लगाए। उनका कहना है कि स्कूल में कार्यरत कुछ लोग छात्राओं के प्रति गलत नजर रखते हैं और जब भी कोई स्टाफ इस बारे में शिकायत करता है, तो स्कूल संचालक उसे नौकरी से निकाल देता है और मानसिक प्रताड़ना देता है। गौरव का कहना है कि जिस घटना का उल्लेख FIR में किया गया है, ऐसी कोई घटना कभी हुई ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और वकीलों के माध्यम से उन्हें लगातार धमकियां दिलाई जा रही हैं।

जब इस मामले में पूर्व चौकी प्रभारी अरविंद से फोन पर बात की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने इंस्पेक्टर के आदेश पर ही FIR दर्ज की है और उन्हें जो विवेचना मिली, उसी के आधार पर कार्रवाई की गई। लेकिन जब उनसे CCTV फुटेज या ऑडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने को कहा गया, तो उन्होंने फोन काट दिया।

जब स्कूल संचालक अभिषेक गोयल से उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने केवल इतना कहा कि यह पुलिस जांच का विषय है। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने फर्जी FIR दर्ज कराई है, तो वे चुप हो गए और कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया। घटना सही होने का दावा करने वाले संचालक का इस पर बात न करना भी सवाल खड़ा करता है कि यदि घटना वास्तव में उनके घर पर हुई थी तो वे बातचीत से क्यों बच रहे हैं।

CO सिटी आशना चौधरी के सरकारी नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु कोई जवाब नहीं मिला। पांचों आरोपियों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी और यह पूरी तरह साबित हो जाएगा कि यह FIR फर्जी तरीके से दर्ज करवाई गई थी।

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