मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: चुनाव आयोग से जवाब तलब, डीएमके-कांग्रेस ने उठाए सवाल; 26 नवंबर को सुनवाई
मुंबई (आरएनआई)। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) को चुनौती देने वाली छह याचिकाओं पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को तय की है।
पीठ ने साथ ही हाईकोर्ट में लंबित संबंधित याचिकाओं को फिलहाल स्थगित रखने का निर्देश भी दिया, ताकि समान मुद्दों पर परस्पर विरोधी आदेश न आएं।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा — "इतनी आशंका क्यों?"
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि वे एसआईआर प्रक्रिया को लेकर इतने चिंतित क्यों हैं। उन्होंने कहा — “ऐसा व्यवहार किया जा रहा है जैसे मतदाता सूची में संशोधन पहली बार हो रहा हो! यह प्रक्रिया नियमित रूप से होती है और चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है — उस पर भरोसा रखें।”
डीएमके और कांग्रेस की आपत्तियाँ
तमिलनाडु में डीएमके, सीपीआई(एम) और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जबकि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की राज्य इकाई ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
डीएमके की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव आयोग यह प्रक्रिया जल्दबाजी में कर रहा है, जिससे लाखों मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।
सिब्बल ने कहा — “पहले मतदाता सूची संशोधन में तीन साल तक लगते थे, अब आयोग कह रहा है कि यह एक महीने में पूरा होगा। तमिलनाडु में नवंबर-दिसंबर के दौरान भारी बारिश और बाढ़ राहत कार्य होते हैं, अधिकारी व्यस्त रहेंगे। फिर दिसंबर में क्रिसमस छुट्टियां और जनवरी में पोंगल फसल उत्सव — यह समय इस प्रक्रिया के लिए बिल्कुल अनुपयुक्त है।”
आयोग की ओर से जवाब
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि “राज्य यह साबित करने की होड़ में हैं कि कौन अधिक पिछड़ा है।” उन्होंने तर्क दिया कि आयोग अपनी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कर रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि हाईकोर्ट में समान मामलों की सुनवाई को रोका जाए, ताकि कोई विरोधाभासी फैसला न आए।
अगली सुनवाई 26 नवंबर को
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब मांगा है और कहा कि अगर पीठ संतुष्ट नहीं हुई, तो वह एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने पर भी विचार करेगी। मामले की अगली सुनवाई अब 26 नवंबर को होगी।
यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि आगामी लोकसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया देशभर में चल रही है, और इसकी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक दलों में मतभेद उभर रहे हैं।
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