'ब्रह्मोस हमारे पास, बकवास बंद करें’ — शहबाज की धमकी पर ओवैसी का पलटवार
नई दिल्ली (आरएनआई) ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार पाकिस्तान को जमकर खरी-खोटी सुनाई है। उन्होंने पाकिस्तान और उनके प्रधानमंत्री समेत अनाप-शनाप बयान देने वाले लोगों को चेतावनी भी दी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कथित बयान 'कोई पाकिस्तान से पानी की एक बूंद भी नहीं छीन सकता' पर एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'ब्रह्मोस है हमारे पास'... उन्हें ऐसी बकवास नहीं करनी चाहिए। ऐसी धमकियों का भारत पर कोई असर नहीं होगा। बहुत हो गया।'
एशिया कप में भारत बनाम पाकिस्तान के बीच संभावित क्रिकेट मैंच पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'मैं क्रिकेट मैच देखने नहीं जा रहा हूं। मेरी अंतरात्मा, मेरा दिल इसकी इजाजत नहीं देता। हमें उस देश के लोगों के साथ क्रिकेट क्यों खेलना है, जो हमें हर दिन धमकी दे रहे हैं? आप पानी देना बंद कर चुके हैं। पानी से बड़ी कोई जरूरत है क्या? आपने बॉर्डर बंद कर दिए। आपने व्यापार बंद कर दिए। कितना नुकसान होगा, 300 करोड़-400 करोड़? मेरा जमीर गवारा नहीं करता।
ओवैसी ने एक मुद्दों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कांग्रेस नेता फिरोज खान की ओर से 2023 के तेलंगाना चुनावों के दौरान कथित तौर पर छह लाख से अधिक फर्जी वोट डाले जाने का आरोप लगाने पर कहा, 'उनके जैसे कई ठुकराए हुए प्रेमी हैं। ये चुनावी कीड़े हैं। वे चुनाव के दौरान जागते हैं और उसके बाद फिर से सो जाते हैं। मैंने तेलंगाना में मुसलमानों और दलितों से विशेष रूप से कहा है कि वे अपने जन्म प्रमाण पत्र बनवा लें। अपने सभी निवास प्रमाण-पत्र व्यवस्थित कर लें। अगर ये लोग इसी तरह बात करते रहे, तो वे सर का खतरा पैदा कर रहे हैं।'
SIR विवाद पर ओवैसी ने कहा, 'दलित और मुसलमान सबसे गरीब हैं। अगर उनका नाम शामिल नहीं किया गया, तो कल यही भाजपा कहेगी कि ये लोग देश के नागरिक नहीं हैं। SIR गरीब समुदाय के लिए सबसे मुश्किल काम है। मुझे पार्टियों के बीच चल रही इन सभी बेकार बहसों से ज्यादा SIR की चिंता है।'
अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ पर ओवैसी ने कहा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति को यह तय करना होगा कि वह उस देश के साथ व्यापार करेंगे, जहां आतंकवाद एक व्यापार है, या भारत के साथ, जो उनका रणनीतिक सहयोगी रहा है। ट्रंप कौन होते हैं, यह कहने वाले कि हमें तेल नहीं खरीदना चाहिए? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से एक सख्त बयान आना चाहिए था, लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से केवल एक बयान आया।'
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