नए राजनीतिक दलों के आवेदनों की अब कड़ी जांच करेगा चुनाव आयोग, पारदर्शिता के लिए बड़ा कदम
आयोग की सख्ती से धोखाधड़ी करके राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता हासिल करने की कोशिशों पर लगाम लग सकेगी। चुनावी प्रणाली दुरुस्त करने के अपने अभियान के तहत आयोग अब जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत राजनीतिक दल के तौर पर पंजीकरण चाहने वाले किसी भी संगठन के संस्थापक सदस्यों के कम से कम 20 रैंडम चुने गए हलफनामों का सत्यापन अनिवार्य करेगा।
नई दिल्ली (आरएनआई) चुनाव आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए नए राजनीतिक दलों के आवेदनों की कड़ी जांच का फैसला किया है। इसके तहत, शुरुआती चरण में ही संस्थापक सदस्यों के हलफनामों का गहन सत्यापन होगा। आयोग ने यह कदम हाल में आवेदन के दौरान दस्तावेजों में कुछ हेरफेर की जानकारी सामने आने के बाद उठाया है।
आयोग की सख्ती से धोखाधड़ी करके राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता हासिल करने की कोशिशों पर लगाम लग सकेगी। चुनावी प्रणाली दुरुस्त करने के अपने अभियान के तहत आयोग अब जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत राजनीतिक दल के तौर पर पंजीकरण चाहने वाले किसी भी संगठन के संस्थापक सदस्यों के कम से कम 20 रैंडम चुने गए हलफनामों का सत्यापन अनिवार्य करेगा। इसका उद्देश्य संदिग्ध आवेदकों के बजाय केवल वास्तविक संगठनों के पंजीकरण को मंजूरी देना है।
चुनाव आयोग ने अपने निर्देश में कहा, संदिग्ध आवेदकों को हटाने और सही आवेदकों का ही पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन प्रक्रिया अनुमोदन के बाद नहीं, बल्कि पंजीकरण चरण में ही की जाएगी। यह गहन जांच चुनाव प्रणाली से नदारत और निष्क्रिय पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) को हटाने के चुनाव आयोग के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। अभियान के पहले चरण में आयोग 9 अगस्त को 334 आरयूपीपी को सूची से हटा चुका है, जिससे सूचीबद्ध आरयूपीपी की कुल संख्या 2,854 से घटकर 2,520 हो गई है। दूसरे चरण में 476 और आरयूपीपी के सत्यापन का निर्देश दिया जा चुका है।
चुनाव आयोग से जुड़ी एक अन्य अहम खबर तमिलनाडु से आई। इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने एक लाख रुपये के जुर्माने के साथ एक जनहित याचिका खारिज कर दिया। याचिका में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप के संबंध में चुनाव आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। यह उल्लेख करते हुए कि मतदाता सूची से संबंधित एक याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है पीठ ने कहा कि यह जनहित याचिका प्रचार के लिए दायर की गई है। इसे खारिज किया जाता है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की प्रथम पीठ ने अधिवक्ता वी वेंकट शिवकुमार की ओर से दायर जनहित याचिका खारिज कर दी।
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