कफ सिरप मामला: तमिलनाडु में 14 साल तक ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप के नाम पर बनता रहा जहर; 364 गंभीर उल्लंघनों की पुष्टि
चेन्नई (आरएनआई) तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में 14 वर्षों से संचालित हो रही श्रीसन फार्मास्युटिकल्स नामक दवा कंपनी से जुड़ा बड़ा खुलासा सामने आया है। यही कंपनी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 20 बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप का निर्माण करती थी। जांच में सामने आया है कि यह कंपनी बिना किसी मानक, स्वच्छता या नियामकीय अनुपालन के जर्जर इमारत में काम कर रही थी, जहां दवाइयां बेहद गंदगी के माहौल में तैयार की जाती थीं।
मध्य प्रदेश में हुई त्रासदी के बाद तमिलनाडु औषधि नियंत्रण विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कंपनी की उत्पादन इकाई का निरीक्षण किया और उसे सील कर दिया। निरीक्षण के दौरान कच्चे माल की खरीद से लेकर उत्पादन, परीक्षण और पैकिंग तक हर चरण में 364 गंभीर उल्लंघन पाए गए। यह निरीक्षण मध्य प्रदेश औषधि नियंत्रक के पत्र प्राप्त होने के एक दिन बाद किया गया था।
औषधि निरीक्षकों — कांचीपुरम के पी. नितिन कुमार और तिरुवल्लूर के आर. शशिकुमार — ने जांच में पाया कि कंपनी ने दवा निर्माण में गैर-फार्मास्युटिकल ग्रेड का प्रोपिलीन ग्लाइकॉल इस्तेमाल किया था, जो मानव उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। कंपनी ने इस रासायनिक पदार्थ की शुद्धता जांचे बिना इसका प्रयोग किया और डायथिलीन ग्लाइकॉल या एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले तत्वों की मौजूदगी का भी परीक्षण नहीं किया।
जांच टीम ने पाया कि इस घटिया रसायन से कई दवाएं तैयार की गईं। कंपनी के पास प्रोपिलीन ग्लाइकॉल का कोई वैध स्टॉक या खरीद चालान भी नहीं मिला, जिससे संदेह गहरा गया कि दस्तावेज़ों को छिपाने के लिए रासायनिक स्टॉक को जल्दबाजी में नष्ट किया गया।
कंपनी का निदेशक रंगनाथन गोविंदराजन (73) फिलहाल फरार है। उसने मद्रास कॉलेज से फार्मेसी में स्नातक किया था। 1980 के दशक में वह ‘प्रोनिट’ नामक हेल्थ टॉनिक खुद बेचता था और इसे गर्भवती महिलाओं के लिए लाभकारी बताता था। बाद में राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने इस दवा को अवैध घोषित किया क्योंकि इसमें इस्तेमाल सामग्री के लिए विभाग से पूर्व अनुमोदन नहीं लिया गया था। गोविंदराजन पर फूड सप्लीमेंट के नाम पर बिना वैध ड्रग लाइसेंस के दवा बेचने का मामला दर्ज किया गया था।
मध्य प्रदेश से पहुंचे एसआईटी की सात सदस्यीय टीम ने भी चेन्नई में दवा फैक्ट्री का निरीक्षण किया और रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कंपनी ने गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की खुलकर अनदेखी की।
इस घोटाले के बाद अरुणाचल प्रदेश सरकार ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने श्रीसन फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित सभी सिरप के वितरण और भंडारण पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है।
इसके अलावा तेलंगाना औषधि नियंत्रण प्रशासन ने भी दो अन्य सिरप — रीलाइफ और रेस्पीफ्रेश टीआर — पर सार्वजनिक चेतावनी जारी करते हुए इनके उपयोग को तत्काल बंद करने की सलाह दी है, क्योंकि इनमें भी जहरीले तत्वों की मिलावट पाई गई है।
यह मामला भारत में दवा निर्माण की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर उन छोटे निर्माताओं पर, जो बिना पर्याप्त निगरानी के वर्षों से सक्रिय हैं।
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