जेल गए तो जाएगी पीएम-सीएम की कुर्सी! 130वें संविधान संशोधन पर बनी JPC, अपराजिता सारंगी बनीं अध्यक्ष
नई दिल्ली (आरएनआई)। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी मंत्री के जेल जाने पर उनकी कुर्सी बची रहेगी या नहीं, इसे लेकर देश की राजनीति में हलचल मच गई है। इसी मुद्दे पर केंद्र सरकार ने 130वें संविधान संशोधन विधेयक (2025) की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन किया है।
इस समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी को सौंपी गई है। बुधवार को जारी की गई सूची में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं। हालांकि, इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) जैसे प्रमुख विपक्षी दलों के नाम शामिल नहीं हैं।
विपक्षी नेताओं में केवल कुछ ही नाम शामिल हैं — जैसे AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी, एनसीपी की सुप्रिया सुले, और अकाली दल (बादल) से हरसिमरत कौर बादल।
विपक्ष का विरोध और बहिष्कार
विपक्षी दलों ने इस संयुक्त समिति का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। टीएमसी और समाजवादी पार्टी ने साफ कहा है कि वे इस समिति का हिस्सा नहीं बनेंगे, क्योंकि यह “लोकतंत्र की प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश” है। कांग्रेस ने भी विधेयक को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताते हुए इसका विरोध किया है।
क्या है 130वें संविधान संशोधन का प्रावधान
इस संशोधन प्रस्ताव का मकसद है कि अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर अपराध में 30 दिनों से अधिक समय तक जेल में रहता है, और उस अपराध में कम से कम पांच साल की सजा का प्रावधान है, तो उसे स्वतः पद से हट जाना होगा। अगर ऐसा व्यक्ति 30 दिन के भीतर जमानत नहीं ले पाता या इस्तीफा नहीं देता, तो उसकी सदस्यता और मंत्री पद स्वतः समाप्त माने जाएंगे।
राजनीतिक हलचल तेज
सरकार का कहना है कि यह संशोधन राजनीति में नैतिकता और जवाबदेही लाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। वहीं विपक्ष इसे “राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने की रणनीति” बता रहा है।
संविधान संशोधन विधेयक को अभी संसद में पेश किया गया है, और अंतिम निर्णय जेपीसी की रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा।
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