जागरूकता से घट रहा सर्पदंश का खतरा, सर्प मित्र और वन विभाग चला रहे मुहिम
कछौना(हरदोई) (आरएनआई)बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। लोगों में जागरूकता की कमी के चलते वह झाड़ फूंक के चक्कर में पड़कर अपनी जिंदगी को खतरे में डाल लेते हैं, जिसका दंश परिवार को झेलना पड़ता है। समय से इलाज न मिलने पर प्रभावित व्यक्ति का जीवन चला जाता है। सांप की बात सुनते ही हमारे मन में अनहोनी घटना को लेकर सांप को देखते ही लोग मार डालते हैं, जबकि बिना दबाव के सर्प हमला नहीं करता है।
कछौना क्षेत्र में सर्प मित्र कुलदीप श्रीवास्तव कई वर्षों से सांपों से बचाव, जागरूकता व प्राथमिक उपचार के लिए कार्य कर रहे हैं, उन्होंने बताया कि 80% सांपों की प्रजाति जहरीली नहीं होती है। क्षेत्र में पाए जाने वाले चार प्रजाति के सर्प ही जहरीले होते हैं। अपने घर, परिवेश, प्रतिष्ठान व आसपास के क्षेत्र को साफ सुथरा रखें। खुली सामग्री, गंदगी के कारण छिपकली, मेंढक, चूहे भोजन व शिकार के लिए घरों व प्रतिष्ठानों में घुस जाते हैं, जिससे सर्पदंश की घटनाएं घटती हैं। खुले मैदान व खेतों में जाने पर पैरों में चप्पल का प्रयोग अवश्य करें। लाठी व टॉर्च का प्रयोग करें। सांप बरसात में बिलों में पानी भरने के कारण बाहर आ जाते हैं। सर्पदंश होने की घटना होने पर घाव के स्थान पर हल्के कपड़े से बांध लें, व्यक्ति को मानसिक रूप से शांति दें। घाव पर किसी तरह की छेड़छाड़ न करें, काटने का समय नोट कर लें। एंटीसेप्टिक या सादे पानी से घाव को हल्का धो लें। तत्काल इमरजेंसी वाहन 108 पर कॉल करें। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज करायें। डॉक्टर की देखरेख में इलाज करायें। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर वैक्सीन की उपलब्धता बनी रहती है।
झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़ें। शुरुआत का एक घंटा काफी महत्वपूर्ण होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में लाखों लोग सर्पदंश का शिकार हो रहे हैं। सर्पदंश से पालतू पशु भी प्रभावित होते हैं जिसकी वैक्सीन ज्यादातर पशु चिकित्सालयों में उपलब्ध नहीं रहती है। कई बार इलाज के लिए काफी देर होने व घबराहट में जीवन प्रभावित होता है। बहुत से लोग झाड़ फूंक व ओझा गुनी के चक्कर में फंसकर अपनी जान गवां बैठते हैं। सर्पदंश में कमी लाने व लोगों में सर्प को लेकर डर खत्म करने के लिए युवा सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप श्रीवास्तव कई वर्षों से मुहिम चला रहे हैं। उनके मोबाइल नंबर 9793120483 पर कॉल करके सर्प को पकड़वा सकते हैं। युवा कार्यकर्ता वन विभाग की टीम के साथ सर्प वाले स्थान पर पहुंचकर रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर सर्प को छोड़ दिया जाता है। उनकी इस मुहिम से लोगों के अंदर धीरे-धीरे डर खत्म हो रहा है सर्प मिलने पर वह तत्काल कुलदीप श्रीवास्तव को कॉल करते हैं, इनके प्रयास से लोगों में काफी जागरूकता आ गई है। इनके प्रयास से सैकड़ो सांपों को मौत से बचाया है, वहीं लोगों का जीवन भी सुरक्षित किया है। उनका कहना है कि पृथ्वी पर सभी जीव जंतु पशु पक्षी का जीने का अधिकार है। वह हमारे परिस्थिकी तत्व में सहायक हैं। सर्पदंश से होने वाली घटनाओं के बचाव के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। सर्पदंश को आपदा श्रेणी में शामिल किया है, प्रभावित व्यक्ति के परिवार को देवीय आपदा के तहत आर्थिक सहायता राशि देने का प्रावधान है।
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