जब ‘प्रेस’ की पहचान सवालों के घेरे में: फर्जी पत्रकारिता और अनैतिक गतिविधियों पर गंभीर आरोप
वी.पी.एस. खुराना
मथुरा(आरएनआई) एक समय था जब पत्रकारिता को समाज का आईना और लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता था। पत्रकार सत्ता से सवाल पूछते थे और समाज को सही दिशा दिखाते थे। लेकिन मौजूदा समय में पत्रकारिता की आड़ में कुछ लोग ऐसे कार्यों में संलिप्त पाए जा रहे हैं, जो न केवल इस पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि पूरे मीडिया जगत को बदनाम भी कर रहे हैं।
नंबर प्लेट पर ‘प्रेस’ और ‘पुलिस’—बिना पहचान, बिना जवाब
मथुरा सहित अन्य जिलों में अकसर ऐसे वाहन देखने को मिल जाते हैं, जिनकी नंबर प्लेट पर वाहन संख्या की जगह ‘प्रेस’ या ‘पुलिस’ लिखा होता है। जब वाहन चालकों से इस संबंध में पूछताछ की जाती है, तो वे कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाते। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई की ओर भी इशारा करती है।
अलीगढ़ मामला: पत्रकारिता की आड़ में अनैतिक गतिविधियों का आरोप
कुछ माह पूर्व अलीगढ़ के बन्नादेवी थाना क्षेत्र में अनैतिक देह व्यापार से जुड़ा एक मामला दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में करीब एक दर्जन युवक-युवतियों के साथ दो कथित पत्रकारों—आनंद और राहुल—की गिरफ्तारी हुई थी। मौके से प्रेस आईडी और विजिटिंग कार्ड भी बरामद किए गए थे। बताया गया कि ये स्वयं को प्रिंट और यूट्यूब पत्रकार बताते थे।
मथुरा में भी सक्रिय होने के आरोप
सूत्रों के अनुसार, मथुरा जनपद में भी कुछ कथित पत्रकारों के अनैतिक देह व्यापार से जुड़े होने के आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि ये लोग युवतियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करते थे, जिसके बदले उन्हें एक हजार से पंद्रह सौ रुपये तक मिलते थे। कथित तौर पर होटल और कुछ चिन्हित स्थानों तक युवतियों को पहुंचाया जाता था।
इन गतिविधियों में शहर कोतवाली, गोविंद नगर और राया थाना क्षेत्रों के कुछ लोग शामिल बताए जा रहे हैं, जो पहले अलग-अलग काम करते थे, लेकिन मीडिया की कथित ‘धमक’ देखकर मामूली खर्च में स्वयं को मीडियाकर्मी बताने लगे।
बिना योग्यता, बिना अनुभव—यूट्यूब बना पहचान
जनपद में ऐसे दो दर्जन से अधिक महिला और पुरुष सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनके पास न तो पत्रकारिता की कोई शैक्षणिक योग्यता है और न ही पूर्व अनुभव। ये लोग यूट्यूब और फेसबुक के माध्यम से खुद को पत्रकार बताकर खबरें प्रसारित करते हैं और आम जनता को भ्रमित करते हैं।
आरोप है कि ऐसे कथित यूट्यूबर पत्रकार जिला अधिकारी कार्यालय और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा नगर पुलिस अधीक्षक कार्यालयों के आसपास मंडराते देखे जाते हैं, जिससे आम नागरिकों में भ्रम और भय की स्थिति बनती है।
कार्रवाई के बाद भी सवाल
कुछ सप्ताह पूर्व शहर कोतवाली में एक कथित पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था, लेकिन उस पर कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि यह एक संगठित ‘यूट्यूबर पत्रकार गैंग’ के रूप में कार्य कर रहा है।
दिल्ली तक पहुंचा मामला
ताजा घटनाक्रम में, दिल्ली के एक थाने में मथुरा के एक यूट्यूबर पत्रकार से पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि वह देह व्यापार के लिए युवतियों को प्रलोभन देता था। बताया जा रहा है कि उक्त व्यक्ति मथुरा की महाविद्या कॉलोनी का निवासी है। नाम न छापने की शर्त पर पड़ोसियों ने भी उस पर संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप लगाए हैं।
प्रशासन और पत्रकार संगठनों से सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं:
फर्जी पत्रकारों की पहचान और सत्यापन की व्यवस्था क्यों नहीं है?
प्रेस आईडी और ‘प्रेस’ लिखी नंबर प्लेट के दुरुपयोग पर रोक क्यों नहीं लग रही?
ऐसे मामलों में प्रशासन और पत्रकार संगठनों की भूमिका क्या होनी चाहिए?
जब तक इन सवालों पर गंभीर और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, तब तक असली और जिम्मेदार पत्रकारों की साख पर ऐसे मामलों की छाया पड़ती रहेगी।
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