गाली भाषी प्रवासी कामगारों की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्यों से जवाब तलब

Aug 14, 2025 - 15:23
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गाली भाषी प्रवासी कामगारों की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्यों से जवाब तलब

नई दिल्ली (आरएनआई) सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि बंगाली भाषी प्रवासी कामगारों को बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में हिरासत में लिया जा रहा है। हालांकि, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हिरासत के संबंध में कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया और कहा कि किसी भी आदेश के परिणाम होंगे, खासकर उन लोगों के संबंध में जो वास्तव में सीमा पार से आए हैं।

पीठ ने कहा, 'जिन राज्यों में ये प्रवासी कामगार काम कर रहे हैं, उन्हें उनके मूल राज्य से उनकी वास्तविक पहचान के बारे में पूछताछ करने का अधिकार है, लेकिन समस्या इस अंतराल में है। अगर हम कोई अंतरिम आदेश पारित करते हैं, तो इसके परिणाम होंगे, खासकर उन लोगों के लिए जो अवैध रूप से सीमा पार से आए हैं और जिन्हें कानून के तहत निर्वासित करने की आवश्यकता है।'

पीठ ने याचिकाकर्ता पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण से केंद्र और नौ राज्यों ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और पश्चिम बंगाल के जवाबों का कुछ समय तक इंतजार करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विकास कार्य करते समय पर्यावरण की रक्षा भी जरूरी है। शीर्ष कोर्ट ने तेलंगाना सरकार को कांचा गाचीबोवली वन स्थल के समग्र पुनरुद्धार के लिए बेहतर प्रस्ताव पेश करने को 6 हफ्ते का समय दिया। सीजेआई जस्टिस बीआर गवई व जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि राज्य को काटे गए पेड़ों की जगह नए पेड़ लगाने होेेंगे। शीर्ष कोर्ट ने 15 मई को कहा था कि हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास पेड़ों की कटाई प्रथम दृष्टया पूर्व नियोजित प्रतीत होती है। सीजेआई ने कहा था कि यह सरकार पर है कि वह जंगल बहाल करे या अफसरों को जेल भेजे। बता दें कि कांचा गाचीबोवली वनक्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर स्वतः संज्ञान लेते हुए शीर्ष कोर्ट ने 3 अप्रैल को अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के त्रिची जिले की थुरैयूर नगरपालिका को आईडीबीआई बैंक की एक शाखा की सील हटाने और उसे चालू रखने का निर्देश दिया। नगरपालिका ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के 6 अगस्त के आदेश के बाद परिसर को सील कर दिया था। हाईकोर्ट ने 48 घंटों के भीतर इसे सील करने का निर्देश दिया था। यह शाखा त्रिची जिले में एक किराए के परिसर में चल रही थी और एक शिकायत के आधार पर, नगर निकाय ने अनधिकृत निर्माण को हटाने के लिए एक प्रवर्तन कार्रवाई शुरू की थी।

यह मामला बुधवार को जब जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया तो बैंक की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि शाखा 2014 से वहां चल रही थी और परिसर को स्थानीय नगरपालिका ने सील कर दिया है। भाटी ने कहा कि शाखा के लगभग 20 हजार ग्राहक हैं और इसमें स्ट्रांग रूम और लॉकर की सुविधा है। उन्होंने अदालत से बैंक शाखा को स्थानांतरित करने के लिए कुछ उचित समय देने और अंतरिम रूप से हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने का आग्रह किया।

उनकी दलीलों पर विचार करते हुए, पीठ ने बैंक को परिसर का कब्जा सौंपने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया। पीठ ने बैंक की याचिका का निपटारा करते हुए कहा, इस बीच, परिसर को सील करने के हाईकोर्ट के निर्देश को स्थगित रखा जाएगा और नगरपालिका, जिसने 9 अगस्त को ही अपनी सील लगा दी है, सील हटाकर ताले खोलेगी और बैंक को सामान्य रूप से काम करने देगी।

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