कांग्रेस का आरोप: मतदाता सूची संशोधन बहाने से जानबूझकर हटाए जा रहे हैं वोटर
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बिहार और कुछ अन्य राज्यों में संशोधन करके, चुनाव आयोग ने स्वीकार किया है कि भारत की मतदाता सूची में सबकुछ ठीक नहीं है। समूह ने कहा कि कांग्रेस बिहार चुनावों और उसके बाद अन्य राज्यों में चुनाव आयोग के एसआईआर प्रस्ताव का कड़ा विरोध करती है।
नई दिल्ली (आरएनआई) कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में गहन संशोधन का विरोध किया। कांग्रेस का कहना है कि इससे सरकार मतदाता सूची से लोगों को जानबूझकर बाहर करने के लिए राज्य मशीनरी का गलत इस्तेमाल कर सकती है।
कांग्रेस के नेताओं और विशेषज्ञों के एक समूह (ईगल) ने एक बयान में कहा कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में यह संशोधन बीमारी से भी बदतर इलाज है। एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक्स पर एक बयान साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा, 'कांग्रेस बिहार के लिए चुनाव आयोग द्वारा आदेशित विशेष गहन संशोधन अभ्यास का विरोध करती है।'
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बिहार और कुछ अन्य राज्यों में संशोधन करके, चुनाव आयोग ने स्वीकार किया है कि भारत की मतदाता सूची में सबकुछ ठीक नहीं है। समूह ने कहा कि कांग्रेस बिहार चुनावों और उसके बाद अन्य राज्यों में चुनाव आयोग के एसआईआर प्रस्ताव का कड़ा विरोध करती है। समूह का कहना है कि संशोधन का मतलब है कि चुनाव आयोग बिहार में घर-घर जाकर लोगों से पहचान और पते के दस्तावेज मांगेगा, और उसीक के आधार पर नए सिरे से वोटर लिस्ट बनाई जाएगी। सरल शब्दों में कहें तो, चुनाव आयोग मौजूदा मतदाता सूची को पूरी तरह से खत्म करना चाहता है और राज्य के लिए नई मतदाता सूची बनाना चाहता है।
कांग्रेस को डर है कि इसमें करोड़ों सरकारी अधिकारी तय करेंगे कि किसके पास सही दस्तावेज हैं और कौन वोट देने लायक है। इससे गरीब और वंचित लोगों के वोटिंग अधिकारों पर खतरा आ सकता है। कांग्रेस के विशेषज्ञों और नेताओं ने कहा कि इससे राज्य मशीनरी की शक्ति का उपयोग करके मतदाताओं को जानबूझकर बाहर करने का बड़ा जोखिम है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने जन्म के वर्ष के आधार पर मतदाताओं और उनके माता-पिता के जन्म प्रमाण पत्र प्रदान करने के लिए कठोर नियम बनाए हैं।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए अब लोगों को अपना जन्म प्रमाण पत्र और माता-पिता का जन्म प्रमाण पत्र भी देना होगा, जो बहुत से लोगों के पास नहीं है। इससे 8.1 करोड़ मतदाताओं को दिक्कत हो सकती है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब चुनाव आयोग ने 8 मार्च को आधार कार्ड से मतदाता सूची की सफाई का प्रस्ताव रखा था, तो अब अचानक तीन महीने बाद गहन समीक्षा की बात क्यों की जा रही है?
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि मतदाता सूची के प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण में राज्य मशीनरी की शक्ति का उपयोग करके मतदाताओं को जानबूझकर बाहर किए जाने का बड़ा जोखिम है। वहीं, चुनाव आयोग ने कहा है कि वह इस साल बिहार से शुरुआत करते हुए छह राज्यों में मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा करेगा, ताकि जन्म स्थान की जांच करके विदेशी अवैध प्रवासियों को बाहर निकाला जा सके। बता दें कि बिहार में इस साल चुनाव होने जा रहे हैं, जबकि पांच अन्य राज्यों- असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 में होने हैं।
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