आर्कटिक पर संकट: चार गुना तेजी से बढ़ रहा तापमान, जल्द हो सकता है बर्फ-मुक्त
आर्कटिक चार गुना तेजी से गर्म हो रहा है। बर्फ का विस्तार घटकर न्यूनतम स्तर तक पहुंच गया है। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर हम नहीं संभले तो जल्द ही आर्कटिक बर्फ-मुक्त हो सकता है।
नई दिल्ली/वाशिंगटन (आरएनआई) आर्कटिक में समुद्री बर्फ का विस्तार इस साल न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। यहां समुद्री बर्फ का विस्तार सिर्फ 46 लाख वर्ग किलोमीटर रह गया। इसके बाद भी बर्फ का तेजी से पिघलना जारी है। यह स्तर अब तक के सबसे कम दर्ज किए गए विस्तारों में शामिल है।
नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) और कोलोराडो विश्वविद्यालय, बोल्डर स्थित नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर (एनएसआईडीसी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सितम्बर में बर्फ का विस्तार आमतौर पर न्यूनतम स्तर पर होता है। हालांकि इस बार 2012 जैसा रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर नहीं बना, लेकिन गिरावट का रुझान लगातार जारी है।
नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के क्रायोस्फेरिक साइंसेज लैब के प्रमुख वैज्ञानिक नाथन कुर्ट्ज का कहना है, यह सही है कि इस साल का न्यूनतम विस्तार रिकॉर्ड स्तर पर नहीं है, लेकिन यह लगातार गिरावट की दिशा को ही दिखाता है, जो बेहद चिंताजनक है।
एनएसआईडीसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक वॉल्ट मेयर के अनुसार गिरावट का यह सिलसिला बढ़ते वैश्विक तापमान और असामान्य मौसम पैटर्न का नतीजा है। वर्ष 2025 की शुरुआत में ही बर्फ में भारी कमी दर्ज हुई थी। जनवरी 2025 में समुद्री बर्फ का विस्तार 1981-2010 के औसत से 12.9 लाख वर्ग किलोमीटर कम रहा, जो अब तक जनवरी में दर्ज दूसरा सबसे कम स्तर है।
अमेरिका की नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) ने पुष्टि की है कि 2024 आर्कटिक की सतह का दूसरा सबसे गर्म साल रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार 2023 में प्रकाशित एक अध्ययन ने चेताया था कि 2030 तक गर्मियों के दौरान आर्कटिक पूरी तरह बर्फ-मुक्त हो सकता है। यानी अनुमान से एक दशक पहले। यहां तक कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में गिरावट भी इस प्रवृत्ति को पलटने में नाकाम रहेगी।
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