52 किलो सोना, 93 करोड़ कैश, करोड़पति आरक्षक सौरभ शर्मा केस में ED ने खोले बड़े-बड़े राज…
भोपाल (आरएनआई) मध्य प्रदेश के इतिहास में पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा का मामला उन चुनिंदा घोटालों में दर्ज हो गया, जिसने एक बार फिर सवाल खड़ा किया कि एक मामूली सा वेतन पाने वाला सरकारी कर्मचारी बेपनाह दौलत कैसे खड़ी कर सकता है? करोड़ों की संपत्ति, सोना-चांदी और नकदी के कारण तीनों जांच एजेंसियों, लोकायुक्त, आईटी और ईडी के हत्थे चढ़े सौरभ शर्मा के इस मामले में कई बड़े राज खुले हैं... क्या आप जानते हैं पूर्व आरटीओ आरक्षक का ये घोटाला...
सौरभ शर्मा केस 2025 में सालभर छापों, गिरफ्तारियों, जमानत याचिकाओं और हाईकोर्ट-ईडी, लोकायुक्त की कार्रवाईयों की वजह से लगातार सुर्खियों में रहा। साल के अंत तक भी न सौरभ और न ही उसके सहयोगी कोई भी जेल से बाहर नहीं आ सका है। यह पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा का ये केस काली कमाई, मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी नियुक्ति जैसे एंगल के कारण पूरे मध्य प्रदेश की सबसे हाई‑वॉल्टेज कहानियों में से एक बना रहा। 2025 जाने को है, ऐसे में ये जानना महत्वपूर्ण होगा कि आखिर क्या था ये मामला, कैसे हुआ था पर्दाफाश… कौन-कौन है आरोपी… 10 जनवरी को किसका फैसला आना है… क्या फिर आएगा कोई बड़ा ट्विस्ट?
एक गोपनीय शिकायत और हुआ पर्दाफाश
दिसंबर 2024 में लोकायुक्त पुलिस को सौरभ शर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की गोपनीय शिकायत मिली। शिकायत में दावा किया गया था कि सौरभ परिवहन विभाग में रहते हुए वाहन पंजीयन, परमिट, फिटनेस और दलाली नेटवर्क के माध्यम से अवैध कमाई कर रहा है। जांच में जो सामने आया वो इनपुट चौंकाने वाले थे। क्योंकि सौरभ की घोषित आय और उसकी लाइफ-स्टाइल में जमीन-आसमान का फर्क था।
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