48 हजार करोड़ की ठगी पर ईडी का बड़ा शिकंजा, पीएसीएल की 3,436 करोड़ की संपत्तियां जब्त
नई दिल्ली (आरएनआई)। देश के सबसे बड़े निवेश घोटालों में शामिल पीएसीएल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 48 हजार करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया है। ईडी ने पंजाब के लुधियाना जिले में पीएसीएल से संबंधित 3,436 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 169 अचल संपत्तियों को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है और इसे लाखों निवेशकों के लिए अहम राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रवर्तन निदेशालय के दिल्ली जोनल कार्यालय द्वारा की गई जांच में सामने आया कि ये सभी संपत्तियां निवेशकों से जुटाई गई रकम से खरीदी गई थीं। लुधियाना में जब्त की गई अचल संपत्तियों की कुल अनुमानित कीमत 3,436.56 करोड़ रुपये आंकी गई है। ईडी ने इन्हें अस्थायी रूप से अटैच किया है, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके।
यह कार्रवाई सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। सीबीआई ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) और पीजीएफ लिमिटेड के संस्थापक दिवंगत निर्मल सिंह भंगू समेत अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और 420 के तहत मामला दर्ज किया था। आरोप है कि आरोपियों ने संगठित साजिश के तहत निवेशकों को गुमराह किया और उनकी मेहनत की कमाई का दुरुपयोग किया।
ईडी के अनुसार, पीएसीएल ने सामूहिक निवेश योजनाओं के नाम पर देशभर के लाखों लोगों से पैसा जमा कराया। सुरक्षित निवेश और ऊंचे रिटर्न का लालच देकर करीब 48,000 करोड़ रुपये जुटाए गए, लेकिन बाद में इस राशि का इस्तेमाल निजी संपत्तियां खरीदने और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया गया। इससे निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि इस मामले में अब तक देश और विदेश में कुल 5,602 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे भी और संपत्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ईडी का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक राशि की वसूली कर उसे प्रभावित निवेशकों को वापस दिलाना है।
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