सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत: नंजेगौड़ा फिलहाल रहेंगे विधायक, हाईकोर्ट का फैसला स्थगित
नई दिल्ली (आरएनआई)। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस विधायक के. वाई. नंजेगौड़ा को बड़ी राहत देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द की गई थी। अब वे फिलहाल विधायक पद पर बने रहेंगे। साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को मालुर विधानसभा क्षेत्र में वोटों की दोबारा मतगणना करने का निर्देश दिया है और नतीजा सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपने को कहा है।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मंगलवार को निर्देश दिया कि मतगणना के बाद जब तक कोर्ट अनुमति न दे, तब तक कोई परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने साफ किया कि हाईकोर्ट द्वारा दिया गया चुनाव रद्द करने का आदेश फिलहाल स्थगित रहेगा, लेकिन मतगणना दोबारा करने का निर्देश बरकरार रहेगा।
मामला क्या है?
2023 के मालुर विधानसभा चुनाव में के. वाई. नंजेगौड़ा ने भाजपा उम्मीदवार के. एस. मंजुनाथ गौड़ा को सिर्फ 248 वोटों से हराया था। मंजुनाथ गौड़ा ने मतगणना में गड़बड़ी और प्रक्रियागत अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में चुनाव रद्द करने की याचिका दायर की थी।
16 सितंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट ने नंजेगौड़ा की जीत को रद्द कर दोबारा मतगणना का आदेश दिया था। इसी फैसले के खिलाफ नंजेगौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
दोनों पक्षों की दलीलें
नंजेगौड़ा की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हाईकोर्ट ने सात मुद्दे तय किए, लेकिन किसी पर स्पष्ट फैसला नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं होने के आधार पर निर्वाचन अधिकारी पर गलत निष्कर्ष निकाला गया।
भाजपा उम्मीदवार मंजुनाथ गौड़ा की तरफ से महेश जेठमलानी ने कहा कि यह सिर्फ वीडियो रिकॉर्डिंग का मामला नहीं है, बल्कि मतगणना में अनियमितताओं का गंभीर आरोप है।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने मंजुनाथ गौड़ा को नोटिस जारी कर 24 नवंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है। तब तक नंजेगौड़ा की विधानसभा सदस्यता बरकरार रहेगी और निर्वाचन आयोग पुनर्गणना की प्रक्रिया शुरू करेगा।
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