संविधान दिवस: राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं–'गुलामी की मानसिकता को खत्म करता है संविधान', नेताओं ने किए संवैधानिक मूल्यों पर जोर
नई दिल्ली (आरएनआई) पुराने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में बुधवार को आयोजित संविधान दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारतीय संविधान राष्ट्र की पहचान की आधारशिला है और यह गुलामी की मानसिकता को त्यागने तथा राष्ट्रवादी सोच अपनाने का मार्गदर्शक दस्तावेज है। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में तीन तलाक, वस्तु एवं सेवा कर (GST) और अनुच्छेद 370 जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये सुधार और कदम समाज में न्याय, समता और सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान राष्ट्र की एकता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करता है। उन्होंने नारी शक्ति बंधन अधिनियम और राष्ट्रगान, वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित स्मरणोत्सव का जिक्र करते हुए महिलाओं और सांस्कृतिक विरासत के सशक्तिकरण पर जोर दिया।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि संविधान सभा के महान विद्वानों और सदस्यों ने करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए संविधान का निर्माण किया। उन्होंने अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद 2024 में जम्मू-कश्मीर में हुई भारी मतदान भागीदारी को लोकतंत्र में भारतीय आस्था का प्रतीक बताया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यदि संविधान का अक्षरशः पालन किया जाए तो भारत 2047 तक एक विकसित देश बन सकता है। उन्होंने संविधान को जीवंत दस्तावेज बताते हुए कहा कि इसके मूल्यों और आदर्शों को अपनाना भावी पीढ़ियों के लिए न्याय, विकास और मानवता का उदाहरण स्थापित करेगा।
कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, सांसद जेपी नड्डा, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे सहित अन्य नेताओं ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया और संवैधानिक मूल्यों की पुनः पुष्टि की।
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