महाराजा रणजीत सिंह प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट द्वारा संस्था के 24 पूर्व कैडेटों को "अचीवर अवॉर्ड" से किया गया सम्मानित
एम.आर.एस.ए.एफ.पी.आई. हथियारबंद सेनाओं के लिए एक 'फीडर संस्थान' के रूप में उभरा है: डायरेक्टर एच.एस. चौहान (सुरेश रहेजा, परवीन कुमार, चंद्र मोहन, साहिल रहेजा)
साहिबजादा अजीत सिंह नगर/ चंडीगढ़ (आरएनआई) महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट (एम.आर.एस.ए.एफ.पी.आई), एस.ए.एस. नगर द्वारा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एन.डी.ए.) एवं अन्य सेवा प्रशिक्षण अकादमियों से स्नातक होकर सशस्त्र बलों में कमीशन प्राप्त करने वाले अपने पूर्व कैडेटों की उपलब्धियों को सम्मानित करने हेतु एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें उन्हें विशिष्ट "अचीवर अवॉर्ड" से नवाजा गया।
इस समारोह की अध्यक्षता संस्थान के संस्थापक निदेशक एवं गवर्निंग बॉडी के सदस्य मेजर जनरल (से.नि.) बी.एस. ग्रेवाल, वी.एस.एम. ने की।
इस "अचीवर अवॉर्ड" समारोह में ए.एफ.पी.आई. के 24 विशेष पूर्व कैडेटों ने भाग लिया, जिनमें से आठ कैडेटों ने हाल ही में मई/जून 2025 में भारतीय सशस्त्र सेनाओं में कमीशन प्राप्त किया है।
मेजर जनरल बी.एस. ग्रेवाल ने कमीशन प्राप्त करने वाले कैडेटों को बधाई देते हुए कहा कि एम.आर.एस.ए.एफ.पी.आई. में प्राप्त प्रशिक्षण उनके करियर के लिए एक लॉन्चपैड का कार्य करेगा। उन्होंने एन.डी.ए. स्नातकों को आगे की ट्रेनिंग के लिए शुभकामनाएं दीं और बेहतरीन परिणाम प्राप्त करने में ए.एफ.पी.आई. के फैकल्टी सदस्यों की प्रतिबद्धता की सराहना की।
संस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को साझा करते हुए एम.आर.एस.ए.एफ.पी.आई. के निदेशक मेजर जनरल अजय एच. चौहान, वी.एस.एम. (से.नि.) ने बताया कि अब तक संस्थान के 255 कैडेट एन.डी.ए. और समकक्ष प्रशिक्षण अकादमियों के लिए चयनित हो चुके हैं, जिनमें से 178 कैडेट सशस्त्र सेवाओं में कमीशंड अधिकारी के रूप में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने आगे बताया कि 15 कैडेटों को पहले ही एन.डी.ए./समकक्ष अकादमियों से जॉइनिंग लेटर मिल चुके हैं और 11 अन्य कैडेट अपने जॉइनिंग लेटर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मेजर जनरल चौहान ने एम.आर.एस.ए.एफ.पी.आई. संस्थान की भूमिका को हथियारबंद सेनाओं के लिए एक ‘फीडर संस्था’ के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि पंजाब सरकार के नेतृत्व में यह संस्थान सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और इसके शानदार परिणाम देशभर में दिखाई दे रहे हैं।
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