मथुरा रिफाइनरी पर गंभीर आरोप, संविदा श्रमिकों ने सांसद से लगाई गुहार
मथुरा (आरएनआई) मथुरा रिफाइनरी में संविदा श्रमिकों के शोषण और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि रिफाइनरी, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आधुनिक मंदिर कहा था, आज “काले धन की फैक्ट्री” बन गई है।
श्रमिकों का कहना है कि उनके मासिक पारिश्रमिक का बड़ा हिस्सा नौकरी से निकालने की धमकी देकर ठेकेदारों और कुछ अधिकारियों द्वारा वापस ले लिया जाता है। इस अवैध वसूली से पैदा काला धन ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच बंटता है। उन्होंने इसे घोर अमानवीय कृत्य बताते हुए कहा कि इस प्रथा ने उन्हें अर्ध-दासत्व की स्थिति में ला खड़ा किया है।
श्रमिक संगठनों ने दावा किया कि बीते वर्ष तत्कालीन कार्यकारी निदेशक से लिखित अनुबंध के जरिए सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की सहमति बनी थी, लेकिन अब तक अनुबंध अस्तित्व में नहीं आया। आरोप है कि कुछ ठेकेदार अब तो ठेके की शुरुआत में ही मजदूरों से डेढ़ लाख रुपये तक गैरकानूनी रूप से वसूलने लगे हैं। इसी दबाव में एक संविदा कर्मी आत्महत्या करने को मजबूर हुआ, जिसकी घटना दबा दी गई।
श्रमिकों ने रिफाइनरी प्रबंधन पर संवेदनहीन रवैये का आरोप लगाया और कहा कि “स्टेटिक और नॉन-स्टेटिक” नाम से श्रमिकों का वर्गीकरण असंवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
श्रमिकों की मांग है कि:
सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए,
पारिश्रमिक वापसी पर पूर्ण रोक लगे,
यातायात भत्ता सहित अन्य सुविधाओं को लिखित अनुबंध में शामिल किया जाए।
लगातार अनदेखी से आंदोलित श्रमिकों ने मथुरा की सांसद से पेट्रोलियम मंत्रालय और आईओसीएल मुख्यालय स्तर पर हस्तक्षेप कर इस मामले का निस्तारण कराने की गुहार लगाई है।
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