पूर्व प्रोफेसर हनी बाबू को पांच साल बाद मिली राहत, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी जमानत
मुंबई (आरएनआई)। दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हनी बाबू को एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को उन्हें जमानत दे दी। करीब पांच साल से अधिक समय से वह नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद थे। अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस मांग को भी खारिज कर दिया, जिसमें हनी बाबू की जमानत पर रोक लगाकर सुप्रीम कोर्ट में अपील का समय मांगा गया था।
जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस रंजीत सिंह भोसले की खंडपीठ ने जमानत मंजूर की और कहा कि विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा। हनी बाबू ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि बिना मुकदमे के लंबे समय से उन्हें जेल में रखा गया है। उनके वकील युग मोहित चौधरी ने अदालत को बताया कि अब तक आरोप तय तक नहीं हुए हैं और निचली अदालत में आरोपमुक्त करने की याचिका भी लंबित है।
हालांकि, एनआईए का आरोप था कि हनी बाबू प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के निर्देशों पर काम कर रहे थे और उसकी विचारधारा व गतिविधियों को बढ़ावा देने की साजिश में शामिल थे।
यह पूरा मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में आयोजित एल्गार परिषद कार्यक्रम और उससे जुड़े घटनाक्रम से संबंधित है। दावा है कि उस कार्यक्रम में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों के चलते अगले दिन भीमा कोरेगांव स्मारक के पास हिंसा भड़की थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और कई लोग घायल हुए थे। मामले की जांच पहले पुणे पुलिस के पास थी, लेकिन बाद में इसे एनआईए को सौंप दिया गया।
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