पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, बिहार के 40% नए विधायकों के पास कॉलेज की डिग्री नहीं
नई दिल्ली (आरएनआई)। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सामने आई पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट ने राज्य की नई विधानसभा की शैक्षणिक तस्वीर को बेहद स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, नई विधानसभा में लगभग 40 प्रतिशत विधायकों के पास कोई कॉलेज डिग्री नहीं है, जबकि स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री वाले सदस्यों की संख्या में कुछ उतार–चढ़ाव देखने को मिला है।
रिपोर्ट बताती है कि 2020 की तुलना में इस बार स्नातकोत्तर डिग्री रखने वाले विधायकों की संख्या 23 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत हो गई है। वहीं उच्चतर माध्यमिक स्तर तक शिक्षित विधायकों का अनुपात भी 38 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गया है। इसके उलट स्नातक विधायकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है—2020 में जहां 40 प्रतिशत विधायक स्नातक थे, वहीं इस बार यह आंकड़ा घटकर 32 प्रतिशत रह गया है।
नवनिर्वाचित विधायकों में महिलाओं की भागीदारी भी हल्की बढ़त के साथ 12 प्रतिशत पर पहुंची है। कुल 243 सीटों में से इस बार 29 महिला विधायक चुनी गई हैं, जबकि 2020 में यह संख्या 26 थी। इन 29 महिला विधायकों में से 13 की उम्र 25 से 39 वर्ष के बीच है और 9 की उम्र 40 से 54 वर्ष के बीच। रिपोर्ट यह भी बताती है कि महिला विधायकों में से आधे के पास कॉलेज की डिग्री नहीं है।
रिपोर्ट में एक और दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि इस बार 55 वर्ष से अधिक उम्र के विधायकों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही चुनाव लड़ने वाले 58 प्रतिशत मौजूदा विधायक दोबारा जीतने में सफल रहे हैं, जिससे पता चलता है कि इस बार अनुभवी नेताओं की हिस्सेदारी कुछ और मज़बूत हुई है।
नई विधानसभा की शैक्षणिक विविधता और प्रतिनिधित्व में यह बदलाव बिहार की राजनीतिक संरचना और मतदाताओं की प्राथमिकताओं को एक बार फिर नए सिरे से उजागर करते हैं।
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