नई खोज से सुलझा 50 साल पुराना रहस्य: सौर ज्वालाएं अब 6.5 गुना ज्यादा गर्म
यह खोज भविष्य में अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी और उपग्रहों व तकनीकी प्रणालियों की सुरक्षा के लिए अहम साबित होगी। सूर्य हमारे सौरमंडल का केंद्र और पृथ्वी पर जीवन का सबसे बड़ा ऊर्जा स्रोत है। इसके भीतर और सतह पर होने वाली गतिविधियां वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से चुनौती बनी हुई हैं।
नई दिल्ली (आरएनआई) सूर्य की रहस्यमयी ज्वालाओं पर नई खोज ने खगोल-विज्ञान की दशकों पुरानी समझ को बदल दिया है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि सौर ज्वालाओं में मौजूद आयन पहले माने गए तापमान से 6.5 गुना ज्यादा गर्म हो सकते हैं, यानी ये 6 करोड़ डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाते हैं। इस अध्ययन ने न केवल आयन और इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा में अंतर को उजागर किया है बल्कि 1970 के दशक से चली आ रही स्पेक्ट्रल लाइन्स की पहेली का भी समाधान कर दिया है।
यह खोज भविष्य में अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी और उपग्रहों व तकनीकी प्रणालियों की सुरक्षा के लिए अहम साबित होगी। सूर्य हमारे सौरमंडल का केंद्र और पृथ्वी पर जीवन का सबसे बड़ा ऊर्जा स्रोत है। इसके भीतर और सतह पर होने वाली गतिविधियां वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से चुनौती बनी हुई हैं। इनमें सबसे प्रमुख घटनाओं में से एक है सौर ज्वालाएं जहां अचानक और तीव्र ऊर्जा विस्फोट सूर्य के वायुमंडल के हिस्सों को एक करोड़ डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा गर्म कर देते हैं। इस प्रक्रिया से निकलने वाली एक्स-रे और विकिरण सीधे पृथ्वी तक पहुंचकर हमारे ऊपरी वातावरण, उपग्रहों और संचार तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रूज के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए नए शोध के अनुसार सौर ज्वालाओं में आयन का तापमान पहले माने गए अनुमानों से कहीं ज्यादा है। जहां पहले वैज्ञानिक मानते थे कि आयन और इलेक्ट्रॉन लगभग समान तापमान पर रहते हैं, अब पता चला है कि आयन इलेक्ट्रॉनों से 6.5 गुना ज्यादा ऊर्जा ग्रहण करते हैं।
अगर यह खोज न होती तो 50 साल से चली आ रही स्पेक्ट्रल लाइन्स की पहेली अनसुलझी बनी रहती। इस अधूरी समझ की वजह से अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी में सटीकता नहीं आ पाती, उपग्रहों और संचार प्रणालियों पर पड़ने वाले वास्तविक खतरों का आकलन मुश्किल होता और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा रणनीतियां भी अधूरी रहतीं।
पृथ्वी-मानव पर असर
सूर्य से निकलने वाले तीव्र विकिरण और गरम कण अंतरिक्ष व पृथ्वी, दोनों के लिए गंभीर चुनौती पैदा करते हैं।
तीव्र विकिरण के चलते संचार उपग्रहों में तकनीकी खराबियां आ जाती हैं या उनका संचालन बाधित हो जाता है। यह स्थिति संचार और इंटरनेट सेवाओं तक पर। असर डाल सकती है।
अंतरिक्ष यात्री भी इससे सुरक्षित नहीं हैं। जब वे पृथ्वी की सुरक्षात्मक परत से बाहर अंतरिक्ष में होते हैं, तो इन विकिरणों के संपर्क में आना उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
सौर ज्वालाओं के कारण पृथ्वी पर रेडियो तरंगों और जीपीएस सिग्नल में रुकावट आती है, जिससे संचार व नेविगेशन प्रभावित होते हैं। हवाई यातायात और संचार सेवाएं बाधित हो सकती हैं।
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