तेलंगाना हाईकोर्ट के जज पर अपमानजनक टिप्पणी से नाराज सुप्रीम कोर्ट, वकील और वादी को माफी का आदेश
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम के तहत एक आपराधिक मामले को खारिज करने पर याचिकाकर्ता एन पेड्डी राजू ने तेलंगाना हाईकोर्ट के जज पर पक्षपात और अनुचितता का आरोप लगाया था। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता और उनके वकील को अवमानना का नोटिस जारी किया था।
नई दिल्ली (आरएनआई) तेलंगाना हाईकोर्ट के जज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने और आरोप लगाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। शीर्ष अदालत ने कहा कि वादी और उसके वकील तत्काल न्यायाधीश से माफी मांगें। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम के तहत एक आपराधिक मामले को खारिज करने पर याचिकाकर्ता एन पेड्डी राजू ने तेलंगाना हाईकोर्ट के जज पर पक्षपात और अनुचितता का आरोप लगाया है।
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने स्वत: संज्ञान याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों पर लगाए गए आरोप अवमाननापूर्ण हैं और उन्हें माफ नहीं किया जा सकता। सीजेआई ने कहा कि हम न्यायाधीशों को कठघरे में खड़ा करने और किसी भी वादी को ऐसे आरोप लगाने की इजाजत नहीं दे सकते। उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश सांविधानिक पदाधिकारी हैं और उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समान सम्मान और छूट प्राप्त है।
इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने बिना शर्त माफी मांगी। साथ ही बयान देने के कारण समझाए। इस पर सीजेआई ने कहा कि इस तरह का आचरण एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति बन गया है, जहां वकील और वादी राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में न्यायाधीशों की ईमानदारी पर सवाल उठाते हैं। संविधान पीठ के एक फैसले में कहा गया है कि न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक आरोप लगाने के लिए वादियों और वकीलों दोनों को अवमानना का दोषी ठहराया जा सकता है।
इसके बाद पीठ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय में पहले से निपटाए गए मामले को फिर से खोलने और एक सप्ताह के भीतर संबंधित न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही याचिकाकर्ता को न्यायाधीश के समक्ष बिना शर्त माफी मांगने का आदेश भी दिया। पीठ ने कहा कि न्यायाधीश एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेंगे कि माफी स्वीकार की जाए या नहीं।
इससे पहले 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के एक जज के खिलाफ अपमानजनक आरोप लगाने पर याचिकाकर्ता और उनके वकील को अवमानना का नोटिस जारी किया था। साथ ही याचिका वापस लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा था कि दंडात्मक कार्रवाई के बजाय ऐसी स्थितियों में माफी स्वीकार करने का पक्ष लिया जाए। उन्होंने कहा कि बुद्धिमत्ता दंड देने के बजाय क्षमा करने में निहित है।
पीठ ने कहा था कि हम न्यायाधीशों को कठघरे में खड़ा होने और किसी भी वादी को न्यायाधीश के खिलाफ इस तरह के आरोप लगाने की अनुमति नहीं दे सकते। यहां हम वकीलों को बचाने की कोशिश कर रहे थे। तेलंगाना उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक आरोप लगाए गए हैं। यह माना गया है कि न केवल एक वादी, बल्कि याचिका पर हस्ताक्षर करने वाला वकील भी अदालत की अवमानना का दोषी है।
उन्हें माफी मांगने का निर्देश देते हुए पीठ ने कहा कि वह इस पर विचार करेगी कि इसे स्वीकार किया जाए या नहीं। पीठ ने कहा कि हम देखेंगे कि माफी वास्तविक है या नहीं। जब हमने भाषा पर नाराजगी व्यक्त की, तो इसे वापस लेने की स्वतंत्रता मांगी गई। हमने अनुरोध को खारिज कर दिया।
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