कर्नाटक के इस मंत्री ने मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल होने के दिए संकेत; दलित सीएम के तौर पर दावा
बंगलूरू (आरएनआई)। कर्नाटक में पिछले कई महीनों से मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें तेज हैं, हालांकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस हाईकमान कई बार इस तरह की चर्चाओं से इनकार कर चुके हैं। इसी बीच राज्य के गृहमंत्री जी. परमेश्वर ने रविवार को स्पष्ट संकेत दिए कि यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो वे भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं। खास बात यह है कि राज्य में ‘दलित मुख्यमंत्री’ की मांग लंबे समय से जारी है और परमेश्वर इस दावे को मजबूती देते दिखे।
जी. परमेश्वर ने कहा, “मैं तो हमेशा रेस में हूं, इसमें कोई नई बात नहीं। 2013 में मैं प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष था और हमारी मेहनत से सरकार बनी, लेकिन इसका श्रेय कभी अपने नाम नहीं किया। अगर तब चुनाव जीत जाता, तो तस्वीर आज अलग हो सकती थी।” उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में पीसीसी अध्यक्ष को मुख्यमंत्री बनाने की परंपरा रही है, हालांकि यह हर बार लागू नहीं होती। फिलहाल न तो हाईकमान ने कोई संकेत दिया है और न ही कांग्रेस विधायक दल में इस मुद्दे पर चर्चा हुई है।
दलित सीएम की मांग फिर गर्म
जब परमेश्वर से पूछा गया कि एससी/एसटी समुदाय के मंत्रियों की लगातार बैठकों से ‘दलित मुख्यमंत्री’ की मांग तेज हो रही है, तो उन्होंने कहा कि यह मांग नई नहीं है। हाल के दिनों में एच.सी. महादेवप्पा, सतीश जारकीहोली और अन्य नेताओं के साथ उनकी मीटिंगें राजनीतिक हलचलों को और बढ़ा रही हैं।
क्या नवंबर में बदल सकता है नेतृत्व?
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने कार्यकाल के ढाई साल पूरे किए। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में यह अटकल फिर तेज है कि 2023 में सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के बीच किसी ‘पावर-शेयरिंग फॉर्मूले’ पर सहमति हुई थी, जिसके तहत नवंबर में नेतृत्व बदल सकता है। इसे कुछ लोग ‘नवंबर क्रांति’ भी कह रहे हैं।
हालांकि गृहमंत्री परमेश्वर ने इन चर्चाओं को मीडिया की कल्पना बताते हुए कहा कि अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ही लेंगे, और वह भी तभी जब जरूरत महसूस होगी।
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