अनुसूचित जातियों में वर्गीकरण को लेकर अपने फैसले की समीक्षा करेगा कोर्ट; शीर्ष अदालत ने जताई सहमति

1 अगस्त को शीर्ष अदालत ने कहा था कि राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने का संवैधानिक अधिकार है, ताकि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से अधिक पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिए आरक्षण दिया जा सके।

Sep 24, 2024 - 14:40
 0  567
अनुसूचित जातियों में वर्गीकरण को लेकर अपने फैसले की समीक्षा करेगा कोर्ट; शीर्ष अदालत ने जताई सहमति

नई दिल्ली (आरएनआई) सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को अनुसूचित जातियों में उप-वर्गीकरण को लेकर दिए गए अपने फैसले की समीक्षा करने के लिए सहमत हो गया है। इस संबंध में कोर्ट में कई याचिकाएं डाली गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस निर्णय में कहा था कि राज्यों को आरक्षण देने के लिए अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने का संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा था कि, सारी अनुसूचित जातियां और जनजातियां एक समान वर्ग नहीं हैं। कुछ दूसरों से ज़्यादा पिछड़ी हो सकती हैं।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी, न्यायमूर्ति पंकज मिथल, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा आज मामले की सुनवाई किए जाने की संभावना है। बता दें कि, 1 अगस्त को शीर्ष अदालत ने कहा था कि राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने का संवैधानिक अधिकार है, ताकि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से अधिक पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिए आरक्षण दिया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया था कि,  राज्यों को सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व 'मात्रात्मक और प्रदर्शन योग्य आंकड़ों' के आधार पर उप-वर्गीकरण करना होगा, न कि 'सनक' और 'राजनीतिक लाभ' के आधार पर। मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 6:1 के बहुमत से ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में शीर्ष अदालत के पांच न्यायाधीशों की पीठ के 2004 के फैसले को खारिज कर दिया। जिसमें कहा गया था कि अनुसूचित जातियों (एससी) के किसी उप-वर्गीकरण की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि वे अपने आप में एक समरूप वर्ग हैं।

न्यायमूर्ति त्रिवेदी को छोड़कर, अन्य पांच न्यायाधीशों ने सीजेआई के निष्कर्षों से सहमति व्यक्त की थी। न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने अपने 85 पन्नों के असहमतिपूर्ण फैसले में कहा था कि केवल संसद ही किसी जाति को एससी सूची में शामिल कर सकती है या उसे बाहर कर सकती है। राज्यों को इसमें फेरबदल करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने फैसला सुनाया कि अनुसूचित जाति एक "सजातीय वर्ग" है जिसे आगे उप-वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। चिन्नैया के फैसले को खारिज करते हुए  सीजेआई ने   अनुसूचित जाति के उप-वर्गीकरण के दायरे पर विचार किया और कहा कि उप-वर्गीकरण सहित किसी भी प्रकार की सकारात्मक कार्रवाई का उद्देश्य "पिछड़े वर्गों के लिए अवसर की पर्याप्त समानता" प्रदान करना है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, राज्य अन्य बातों के साथ-साथ कुछ जातियों के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के आधार पर उप-वर्गीकरण कर सकता है।  राज्य को यह साबित करना होगा कि किसी जाति/समूह का कम प्रतिनिधित्व उसके पिछड़ेपन के कारण है। राज्य को सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता पर डेटा एकत्र करना होगा क्योंकि इसे पिछड़ेपन के संकेतक के रूप में उपयोग किया जाता है।

शीर्ष अदालत ने 8 फरवरी को चिन्नैया फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा है। जिसमें कहा गया था कि सदियों से बहिष्कार, भेदभाव और अपमान झेलने वाले सभी एससी एक समरूप वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्हें उप-वर्गीकृत नहीं किया जा सकता।

Follow    RNI News Channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VaBPp7rK5cD6XB2

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
RNI News Reportage News International (RNI) is India's growing news website which is an digital platform to news, ideas and content based article. Destination where you can catch latest happenings from all over the globe Enhancing the strength of journalism independent and unbiased.