हार्वर्ड की फंडिंग पर संकट: ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों के वीजा प्रोग्राम की जांच शुरू की
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच टकराव और गहराता जा रहा है। ताजा विवाद में ट्रंप सरकार ने हार्वर्ड के विदेशी छात्रों और शोधकर्ताओं के वीजा प्रोग्राम को लेकर जांच शुरू कर दी है। विदेश विभाग का कहना है कि यह जांच यह सुनिश्चित करने के लिए है कि यह कार्यक्रम अमेरिकी हितों के खिलाफ न हो।
वाशिंगटन (आरएनआई) अमेरिका में ट्रंप प्रशासन और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच चल रहे विवाद में अब एक नया मामला सामने आया है। इसके तहत ट्रंप प्रशासन ने हैर्वर्ड यूनिवर्सिटी के खिलाफ एक और जांच शुरू कर दी है। इस बार मामला उन विदेशी छात्रों और शोधकर्ताओं से जुड़ा है जो वीजा के जरिए अमेरिका में पढ़ाई या शोध के लिए आते हैं। इस बात को लेकर अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि वह यह जांच कर रहा है कि क्या हैर्वर्ड अब भी एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम का हिस्सा बना रह सकता है या नहीं।
यह वही कार्यक्रम है जिसके तहत विदेशी नागरिक अमेरिका में शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए वीजा प्राप्त करते हैं। इसको लेकर विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को बताया कि जांच के पीछे यह सुनिश्चित करना है कि यह कार्यक्रम अमेरिका के हितों के खिलाफ न जाए। बता दें कि यह जांच ऐसे समय में हो रही है जब हार्वर्ड पहले ही ट्रंप प्रशासन के कई कदमों की वजह से निशाने पर है। अप्रैल में एक संघीय यहूदी-विरोधी (एंटीसेमिटिज्म) टास्क फोर्स की मांगों को हैर्वर्ड ने ठुकरा दिया था, जिसके बाद से सरकार ने उस पर दबाव बढ़ा दिया।
मामले में ट्रंप प्रशासन ने आरोप लगाया है कि हार्वर्ड ने यहूदी विरोध को बर्दाश्त किया है और इसे आधार बनाकर विश्वविद्यालय की फंडिंग रोकी जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो हैर्वर्ड को मिलने वाली छात्रवृत्तियों और लोन समेत करीब 2.6 अरब डॉलर की फंडिंग पर असर पड़ेगा। यह सजा डेथ सेंटेंस के नाम से जानी जाती है।
ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई पर हार्वर्ड ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। हार्वर्ड के प्रवक्ता जैसन न्यूटन ने कहा कि यह जांच ट्रंप प्रशासन की एक और बदले की कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि हैर्वर्ड अंतरराष्ट्रीय छात्रों और शोधकर्ताओं का स्वागत करता रहेगा और उन्हें अमेरिका आने में हरसंभव मदद करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी सभी नियमों का पालन कर रही है।
ट्रंप प्रशासन के इस कार्रवाई की पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय ग्लोबल एंगेजमेंट के डायरेक्टर रहे ब्रेट ब्रुएन ने भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इसका नुकसान केवल हार्वर्ड को नहीं, बल्कि पूरे अमेरिकी उच्च शिक्षा तंत्र और उद्योग को होगा, जो दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली छात्रों पर निर्भर करता है।
मामले में इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने यह भी धमकी दी थी कि हैर्वर्ड की टैक्स-फ्री स्थिति (टैक्स-एग्जेम्प्ट स्टेटस) को भी खत्म किया जा सकता है। यानी विश्वविद्यालय को टैक्स छूट मिलना बंद हो सकता है। हार्वर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एलन गारबर ने कहा है कि विश्वविद्यालय ने एंटीसेमिटिज़् के खिलाफ जरूरी कदम उठाए हैं, लेकिन वह सरकार की अनुचित मांगों के आगे झुकेगा नहीं।
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