शौक भी सबसे जुदा – इंसानियत के रक्षक प्रमोद भार्गव
गुना (आरएनआई) ये जो लाल कुर्ता पहने हुए व्यक्ति है न, ये भीड़ से थोड़ा अलग है। ये अपने गुना का ही बंदा है। इसका शौक भी सबसे जुदा है। शौक भी ऐसा कि इसके काम देखकर धवल वस्त्र धारी कथित समाजसेवी भी खुद को बौना मान लें। नाम है प्रमोद भार्गव।
ये अपने जैसा ही आम आदमी है। इसे शौक है, भूले भटके लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने का। ये कभी बेसहरा बीमारों और विक्षिप्त जनों को अस्पताल पहुंचा कर बीमार व्यवस्था को झकझोरने की कोशिश करता है। तो कभी बेघर किए गए बुजुर्गों को आश्रम में रखवा कर उनके भरण पोषण की व्यवस्था करते भी दिखाई देता है। पिछले तीन सालों में ये जान का जोखिम मोल लेकर गुना के चाचौड़ा कुंभराज क्षेत्र में दबंगों द्वारा बंधुआ बनाए गए करीब दो सौ लोगों को मुक्त करा चुका है।
अक्सर ये सामाजिक मुद्दों पर कलम रगड़ कर जिम्मेदारों की खाल पर चढ़ी मक्कारी की कालिख खुरच कर साफ करने की कोशिश भी करता है।
बड़े पुल के पास हर रविवार को प्रेम से साग पूड़ी रायता खाते हुए जिन गरीब, मजदूरों को अपन देखते हैं न, उनके पेट को भरने के लिए ये बंदा अपने ही जैसे मतवालों के साथ समाज से सहयोग भी मांगता है। ऐसे कई और भी काम दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं। इसके इस पागलपन से प्रभावित लोग इसके संकल्प को सफल भी करते है।
वास्तव में असली समाज सेवा कोई दिखावा या सौदा नहीं है। समाजसेवी वही है जो बदले में कोई प्रतिफल न चाहे। ऐसे लोग अपने शहर की धरोहर हैं। पैसे वालों, नेताओं की दृष्टि में ये छोटे होते हुए भी बहुत बड़े होते हैं।
दोस्तों। नेता, अभिनेता, कलेक्टर, एसपी, बड़ा व्यवसाई या पूंजीपति बनना फिर भी आसान है। लेकिन यदि दुनिया का सबसे कठिन काम कोई है तो वह है एक नेक इंसान बनना। यदि आपके मन में दीन दुखियों के प्रति करुणा का भाव नहीं है, किसी की मदद आपसे नहीं होती, आप समाज के लिए कुछ अच्छा नहीं कर सकते तो आप कुछ भी क्यों न बन जाएं, आप पतित ही हैं।
भाई समान, निष्काम कर्मयोगी, दीनबंधु प्रमोद भार्गव को, माफ कीजिए, प्रमोद भार्गव जी को, अपने हृदयतल से जन्मदिवस की स्नेहिल शुभकामनाएं देता हूं। आप लोकेषणा से परे रहते हुए ऐसे ही अपने कार्य में सन्नद्ध रहें, ईश्वर आपको सदैव प्रसन्न रखे।
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