राधे-राधे की गूंज में डूबा वृंदावन — बांकेबिहारी दर्शन को उमड़ा जनसागर, पंचकोसी परिक्रमा में बही श्रद्धा की धारा
मथुरा (आरएनआई)। देवोत्थान एकादशी के पावन अवसर पर शनिवार को वृंदावन में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही ठा. श्री बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज से आए भक्तों ने बांकेबिहारी के दर्शन के बाद पंचकोसी परिक्रमा कर पुण्य अर्जित किया। पूरे परिक्रमा मार्ग में “राधे-राधे” और “जय श्री बांकेबिहारी” के जयकारे गूंजते रहे, जिससे पूरा वृंदावन भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
शहर की कुंज गलियों से लेकर मंदिर परिसर तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। भक्तजन भक्ति भाव से झूमते हुए भजनों का गायन करते नजर आए। मंदिर के जगमोहन में भक्तों ने हाथ जोड़कर ठाकुरजी के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।
पंडित राम किशोर दुबे ने बताया कि देवोत्थान एकादशी के दिन बांकेबिहारी के दर्शन का विशेष महत्व होता है। इसी दिन भगवान विष्णु के चार महीने के शयन काल की समाप्ति होती है, और इसके बाद मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होता है।
परिक्रमा मार्ग पर समाजसेवियों और स्थानीय भक्तों ने परिक्रमार्थियों के लिए कुट्टू की पकौड़ी, पेठा, फल, चाय और शीतल पेयजल का वितरण किया। शाम तक वृंदावन में श्रद्धा, भक्ति और सेवा की अनोखी छटा बिखरी रही, जिसने हर आगंतुक के मन को भक्ति भाव से भर दिया।
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