मोहर्रम में मजलिसों और शहादतनामा का दौर जारी, कर्बला की शहादत पर छलके आंसू
फतेहपुर (आरएनआई) असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाये जाने वाले मोहर्रम को लेकर जहां चांद दिखते ही शिया समुदाय में मजलिसों का जो दौर शुरू हुआ था वह लगातार जारी है। सुन्नी मुसलमानों के घरों पर शहादतनामा पढ़कर कर्बला के शहीदों की शहादत का बयान किया जा रहा है। मजलिसों में कर्बला के मंजर को सुनकर जहां लोगों की आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ रहा है। वहीं शहादतनामा में भी कर्बला की जंग का वाक्या सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मजलिसों व शहादतनामा के बाद तबर्रूख का भी वितरण किया जा रहा है। मजलिसों में बड़ी संख्या में लोग उमड़ रहे हैं। जहां पर मजलिस के बाद मातम व सीनाजनी भी की जा रही है।
यूं तो मोहर्रम का चांद दिखते ही शिया समुदाय में मजलिसें शुरू हो जाती हैं, जो तीजा तक जारी रहती हैं। सुन्नी मुसलमानों के घरों पर महिलाएं शहादतनामा के जरिए कर्बला की जंग का वाक्या बयान करती हैं। मोहर्रम की तीन तारीख को भी शहर के आधा दर्जन शिया मुसलमानों के घरों पर महिलाओं व पुरूषों की मजलिसें आहूत की गयीं। इन मजलिसों को शिया समुदाय के मौलानाओं ने खेताब करते हुए यजीद द्वारा हुसैनी परिवार पर ढहाये गये जुल्मों का बयान किया गया। बयान के बीच में ही भूखा व प्यासा रखे जाने का वाक्या सुनते ही लोगों की आंखों से आंसू निकल आये। बाद मजलिस सभी स्थानों पर नौहा ख्वानी के बीच मातम व सीनाजनी का दौर भी जारी है। मोहर्रम को लेकर शिया समुदाय के सभी लोग काले लिबास में दिखते हैं। चालीस प्रतिशत लोगों ने पैरों से चप्पलें भी उतार रखी हैं। इसी क्रम में सुन्नी मुसलमानों के घरों पर सुबह से लेकर शाम तक शहादतनामा पढ़ा जा रहा है। मजलिस व शहादतनामा की समाप्ति पर प्रसाद का वितरण भी लगातार किया जा रहा है।
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