‘भारत दखल नहीं दे सकता, लेकिन समझा सकता है’; बांग्लादेश में हिंसा पर शशि थरूर की दो टूक
नई दिल्ली (आरएनआई)। बांग्लादेश में हिंदू युवक की लिंचिंग और वहां बढ़ती हिंसा को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने स्पष्ट और संतुलित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी हाल में बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता, लेकिन अपने कूटनीतिक प्रभाव और ऐतिहासिक संबंधों के आधार पर वहां की सरकार पर रचनात्मक दबाव जरूर बना सकता है।
शशि थरूर ने कहा कि बांग्लादेश के निर्माण और उसके विकास में भारत की भूमिका ऐतिहासिक रही है। इसी वजह से भारत को यह नैतिक अधिकार है कि वह ढाका सरकार से बातचीत कर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने का आग्रह करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि कूटनीति के जरिए ही ऐसे संवेदनशील मुद्दों का समाधान निकाला जाना चाहिए।
गौरतलब है कि बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना सामने आई है। इस घटना के बाद न सिर्फ बांग्लादेश बल्कि भारत सहित कई देशों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
एक अखबार को दिए इंटरव्यू में शशि थरूर ने दो टूक कहा कि भारत किसी पड़ोसी देश के घरेलू मामलों में दखल नहीं दे सकता, लेकिन अपने मजबूत कूटनीतिक रिश्तों और संवाद के माध्यम से बांग्लादेश सरकार को सकारात्मक और जिम्मेदार कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकता है। उनका मानना है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है और इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग व संवाद की अहम भूमिका होती है।
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