मेनस्ट्रीम मीडिया पर संकट गहराया, डिजिटल दौर में बदल रही पत्रकारिता की तस्वीर

Feb 18, 2026 - 17:41
Feb 18, 2026 - 17:42
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मेनस्ट्रीम मीडिया पर संकट गहराया, डिजिटल दौर में बदल रही पत्रकारिता की तस्वीर

देश और दुनिया में मीडिया के बदलते परिदृश्य को लेकर गंभीर बहस छिड़ी हुई है। एक समय था जब अखबार जनमत निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम माने जाते थे और टीवी न्यूज चैनल सूचना का मुख्य स्रोत थे, लेकिन अब डिजिटल और सोशल मीडिया के तेजी से विस्तार ने पारंपरिक मीडिया को चुनौती के कठघरे में खड़ा कर दिया है।

करीब 2009 में वरिष्ठ पत्रकार मधुसूदन आनंद ने यह भविष्यवाणी की थी कि वर्ष 2040 तक दुनिया के अधिकांश अखबार बंद हो जाएंगे। उस समय यह कथन अतिशयोक्ति जैसा लगा था, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विस्तार के बावजूद विज्ञापन बाजार में प्रिंट की मजबूत हिस्सेदारी बनी हुई थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में परिस्थितियां तेजी से बदली हैं। वैश्विक स्तर पर बड़े मीडिया संस्थानों में छंटनी, कई प्रकाशनों का बंद होना और टीवी चैनलों की आर्थिक चुनौतियां इस बदलाव की ओर इशारा करती हैं। कोरोना काल ने इस संकट को और गहरा कर दिया, जब अनेक अखबारों और पत्र-पत्रिकाओं को अपने संस्करण बंद करने पड़े।

भारत में भी प्रिंट मीडिया की प्रसार संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है और टीवी चैनल टीआरपी तथा राजस्व के दबाव से जूझ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि पारंपरिक मीडिया ने निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर अपनी साख खोई है, जिसके कारण दर्शक और पाठक वैकल्पिक प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहे हैं। कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं को लेकर कवरेज पर सवाल उठते रहे हैं, जबकि वही मुद्दे सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा में रहे।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने सूचना के प्रसार को लोकतांत्रिक और त्वरित बनाया है। स्वतंत्र पत्रकारों और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स की पहुंच लाखों-करोड़ों दर्शकों तक हो रही है। इससे पारंपरिक मीडिया के सामने अस्तित्व का प्रश्न खड़ा हो गया है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि डिजिटल युग में अवसर भी कम नहीं हैं, बशर्ते मीडिया संस्थान तकनीक, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को अपनाएं।

मीडिया शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों और इस क्षेत्र में करियर बनाने की सोच रहे युवाओं के सामने अब नई चुनौतियां हैं। उन्हें यह तय करना होगा कि वे किस प्रकार की पत्रकारिता करना चाहते हैं—परंपरागत ढांचे में या डिजिटल नवाचार के साथ। स्पष्ट है कि पत्रकारिता का स्वरूप बदल रहा है और आने वाले वर्षों में वही संस्थान टिक पाएंगे जो समय के साथ खुद को ढाल सकेंगे।

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