पश्चिम बंगाल में कमल खिलाने की तैयारी तेज, भाजपा ने छह ज़ोन में बांटा राज्य; शीर्ष नेताओं को मिली नई जिम्मेदारियाँ

Nov 28, 2025 - 11:11
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पश्चिम बंगाल में कमल खिलाने की तैयारी तेज, भाजपा ने छह ज़ोन में बांटा राज्य; शीर्ष नेताओं को मिली नई जिम्मेदारियाँ

नई दिल्ली (आरएनआई) बिहार चुनाव में शानदार जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल को अगला राजनीतिक लक्ष्य बताया था। अब भाजपा इस लक्ष्य को साधने के लिए पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतर आई है। पार्टी ने पूरे बंगाल को छह हिस्सों में बांटकर प्रत्येक ज़ोन के लिए अलग-अलग चुनाव प्रभारी नियुक्त किए हैं। इन नेताओं को स्थानीय ज़रूरतों के आधार पर मुद्दों की पहचान, रणनीति निर्माण और बूथ स्तर तक पहुंच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। नियुक्त किए गए नेताओं में दिल्ली भाजपा के संगठन मंत्री पवन राणा और हिमाचल प्रदेश के संगठन मंत्री सिद्धार्थन भी शामिल हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़े दावे किए थे, लेकिन आक्रामक चुनाव प्रचार के बावजूद पार्टी 38.14% वोट शेयर के साथ 77 सीटों तक ही सीमित रह गई। हालांकि 74 सीटों की बढ़त अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन भाजपा सत्ता तक नहीं पहुंच सकी। इस बार पार्टी ने पिछले अनुभवों से सीख लेकर जमीनी रणनीति पर अधिक ध्यान देने का फैसला किया है।

भाजपा रिसर्च टीमें हर इलाके में जनता के बीच जाकर वास्तविक मुद्दों की पहचान कर रही हैं। इसके लिए गैर-राजनीतिक समूहों के माध्यम से सर्वे भी कराए जा रहे हैं, ताकि हर क्षेत्र में स्थानीय जरूरतों और जनभावनाओं के अनुरूप मुद्दों को उठाया जा सके। पार्टी का मानना है कि आक्रामक प्रचार से ज्यादा प्रभावी जमीनी संपर्क और स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित रणनीति साबित होगी।

एसआईआर मुद्दा बन सकता है भाजपा का हथियार
पश्चिम बंगाल में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) का सबसे तीखा विरोध देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे बंगालियों और मुसलमानों के खिलाफ बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। वहीं भाजपा का कहना है कि एसआईआर की शुरुआत के बाद बांग्लादेश से पलायन कर रहे घुसपैठियों की संख्या में दिख रही वृद्धि स्थानीय लोगों के बीच असंतोष पैदा कर रही है। एक भाजपा नेता का दावा है कि ममता जितना एसआईआर का विरोध कर रही हैं, उतना ही बंगाल का मूल समुदाय एकजुट हो रहा है और इसे अपने अधिकारों पर खतरे के रूप में देख रहा है।

एंटी-इनकंबेंसी का लाभ उठाने की तैयारी
तीन बार सत्ता में रह चुकी ममता सरकार के खिलाफ एक बड़ा वर्ग असंतुष्ट है—भाजपा इसी एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर को भुनाने की रणनीति बना रही है। पार्टी रोज़गार, आजीविका और बंगाल की अस्मिता जैसे मुद्दों पर विस्तृत अभियान छेड़ने वाली है। दिसंबर में प्रधानमंत्री मोदी की संभावित बंगाल यात्रा को इसी रणनीति की शुरुआत माना जा रहा है।

टीएमसी के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से भाजपा को उम्मीदें
टीएमसी नेता हुमायूं कबीर के विवादित बयान—बाबरी ढांचे के निर्माण की बात—ने बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। भाजपा का मानना है कि टीएमसी मुसलमान वोटरों को आकर्षित करने के लिए जितना आक्रामक प्रचार करेगी, उतना ही अन्य समुदायों का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में हो सकता है।

भाजपा ने इस बार जमीन से जुड़े मुद्दों, एंटी-इनकंबेंसी, एसआईआर विवाद और ध्रुवीकरण की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बंगाल में कमल खिलाने की नई और व्यापक चुनावी रणनीति तैयार कर ली है।

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