जो जन्मा है वह मरेगा ही, संकट में केवल धर्म ही देता है शरण - मुनिश्री निरामय सागरजी
गुना (आरएनआई) जिंदगी मौत की अमानत है जिसने जन्म लिया है उसे मरना ही होगा। चाहे वह राजा, महाराजा, इंद्रों का राजा, सौ धर्म इंद्र या चक्रवर्ती ही क्यों न हो। कोई भी तंत्र, मंत्र हमें मरने से बचा नहीं सकता। मणि मंत्र तंत्र बहु होई, मरते न बचावे कोई। जिसने जन्म लिया है उसे मरना ही होगा। इंद्रों की आयु सागरों में बहुत ज्यादा होती है इसलिए उन्हें अमर कहते हैं पर मरना तो उनको भी पड़ता है। उक्त धर्मोपदेश चौधरी स्थित महावीर भवन में चातुर्मासरत मुनिश्री योग सागरजी महाराज केससंघ मुनिश्री निरामय सागरजी महाराज ने कार्तिकेअनुप्रेक्षा महाग्रंथ का स्वाध्याय कराते हुए दिए।
मुनिश्री ने अशरण भावना को समझाते हुए कहा कि कौन हमारा है, कौन पराया है। यह संकट के समय में मालूम पड़ जाता है। जब दुनिया के सारे दरबाजे बंद हो जाते हैं तो तब एकमात्र धर्म का दरबाजा खुला रहता है। परंतु दुख और संकट के समय हमारी परीक्षा होती है, कि हम कहां जाते हैं। लोग ऐसे समय में कुगुरु, कुदेव की शरण में जाकर अपना रोग और बढ़ा लेते है।
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