गुना: नानाखेड़ी पुल फिर डूबा, 2025 की बाढ़ ने दिखाई प्रशासनिक लापरवाही और अतिक्रमण की सच्चाई

Aug 31, 2025 - 18:27
Aug 31, 2025 - 18:28
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गुना: नानाखेड़ी पुल फिर डूबा, 2025 की बाढ़ ने दिखाई प्रशासनिक लापरवाही और अतिक्रमण की सच्चाई

गुना (आरएनआई) जब जब भी एक दिन में लगातार भारी बारिश होगी तब तब गुना का नानाखेड़ी का पुल डूबेगा। 2021 के बाद 2025 में भी यही स्थिति बनी। 29 जुलाई 2025 को आई बाढ़ से भारी तबाही मची। नानाखेड़ी का पुल डूब गया। आसपास के इलाकों में पानी भर गया। ऐसा क्यों हुआ? इसकी तकनीकि वजह समझने के लिए किसी रॉकेट साइंस को पढ़ने की जरूरत नहीं है। न ही आईआईटी करने की जरूरत है। मोटी बुद्धि से भी इसकी वजह आसानी से समझी जा सकती है। इसके लिए पहले ये दो ग्राफिक्स समझिए।

दरअसल, 20 साल पहले तक नानाखेड़ी को शहर से दूर माना जाता था। ये पूरा क्षेत्र खुला था, खेत थे, जंगल थे। बारिश का पानी निकलने के कई प्राकृतिक रास्ते थे। वैध अवैध कॉलोनियां नहीं बसी थीं। गोपालपुरा डैम से आकर नानाखेड़ी के पुल के नीचे से निकलकर, सकतपुर के पास गुनिया में जाकर मिलने वाले ओड़िया नाले पर भी बेतहाशा अतिक्रमण नहीं थे। नानाखेड़ी का पुराना पुल भी तेलघानी के पास स्थित बड़े पुल जैसा था। तब पानी आराम से निकल जाता था। 

एबी रोड का सन् 1840 में निर्माण करने के लिए दो खंबा बाईपास रोड, बिलोनिया जोड़ से नानाखेड़ी की ओर दोनों तरफ खंती खोद कर सड़क में मिट्टी भरी गई थी। खंती खोदे जाने से सड़क के दोनों तरफ बरसाती नाले निर्मित हुए। जिनसे दोनों तरफ के मैदानी क्षेत्र का पानी बहता हुआ आकर नानाखेड़ी के पुल के दोनों ओर ओड़िया नाले में समा जाता था। ऐसे ही बीज निगम से नानाखेड़ी की ओर भी सड़क के दोनों ओर बरसाती नाले होने से इस ओर का पानी भी नानाखेड़ी की ओर ढलान होने से बहकर ओड़िया में समा जाता था।

लेकिन इन 20 सालों में भू माफिया, सफेदपोश कलाकारों, कथित समाजसेवियों, व्यवसायियों, अमीरों, गरीबों यानि जिसे मौका हाथ लगा उसने अपने लाभ के लिए इस पूरे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति बदल डाली। दादाबाड़ी से नानाखेड़ी तक एबी रोड के समानांतर बने प्राकृतिक नाले में एक-एक दो-दो छोटे-छोटे पाइप डालकर मुरम भरके इस ओर के नाले को पाट दिया गया। जिससे भारी मात्रा में पानी की निकासी बाधित हो गई। अब बारिश का पानी सड़क के ऊपर से दूसरी ओर होकर जाता है।

सड़क के दूसरी तरफ रॉयल विलास हाउस से नानाखेड़ी की ओर सड़क के समानांतर बहने वाले नाले को इस ओर के लोगों ने आरसीसी की स्लैब डालकर पानी निकासी का ड्रेनेज बनाया है। लेकिन जब भी भारी बारिश होती है और सड़क की दूसरी ओर का पानी भी जब इसमें ही आकर समाता है तो यह ड्रेनेज छोटा पड़ जाता है और पानी उफान मारकर सड़क पर बहने लगता है।

यही स्थिति बीज निगम की ओर से आने वाले पानी को लेकर निर्मित होती है। यहां नानाखेड़ी से गोपालपुरा मार्ग के तिराहे पर सड़क बनाते समय पुल नहीं बनाया गया। बल्कि खराब इंजीनियरिंग का नमूना प्रस्तुत कर बीज निगम से नानाखेड़ी नाले में रोड क्रॉसिंग कर पानी निकासी के लिए पाइप डाल दिए गए। जिनसे बारिश का पानी आसानी से नहीं निकलता बीज निगम का फार्म तालाब बन जाता है। 

यानि शहर के सभी नदी/नालों पर अतिक्रमण तो हुआ ही। रही सही कसर सरकार के निर्माण विभाग नगरपालिका आदि ने पूरी कर दी। जिन्होंने "बाढ़ के पानी का आकलन" करने के बजाए "बजट का हिसाब लगाकर" मनमाने ढंग से पुल पुलिया बना डालीं। मसलन नानाखेड़ी के पुराने पुल के साथ निर्मित एक्सटेंशन पुल की डिजाइन ऐसी नहीं है कि उसमें से गोपालपुरा डैम के ओवरफ्लो का पानी, बिलोनिया जोड़ से सड़क के दोनों ओर के क्षेत्र का पानी, नानाखेड़ी मंडी का पानी, भगतसिंह कॉलोनी, दशहरा मैदान, गोपालपुरा, बीज निगम आदि भौगोलिक क्षेत्र का बरसाती पानी आसानी से निकल सके।

यदि इस क्षेत्र में बाढ़ का स्थाई समाधान चाहिए तो बिलोनिया से नानाखेड़ी तक सड़क के दोनों ओर के बारिश के पानी का आकलन कर स्लैब डालकर बड़े ड्रेनेज बनाना होंगे। ताकि पानी आसानी से उनमें होकर बहता हुआ आए और ओढ़िया में आकर मिल सके। इसी तरह 250 बीघा क्षेत्र के बीज निगम के पानी के लिए भी रोड क्रॉस कर पानी की निकासी का उचित मार्ग बनाना होगा। साथ ही साथ इस क्षेत्र के पूरे फ्लड का कैलकुलेशन कर नानाखेड़ी के पुल का भी विस्तार करना होगा।

अभी नानाखेड़ी पुल में अप स्ट्रीम में 90 डिग्री एंगल में त्रिवेणी संगम की स्थिति है। एक गोपालपुरा से आने वाला ओड़िया नाला, दूसरा बीज निगम से आने वाले पानी की पाइप पुलिया और तीसरा रॉयल विलास हाउस की ओर से आने वाले पानी की स्लैब पुलिया। बारिश में यहां तीन दिशाओं से आने वाला पानी एक दूसरे को ठोकर मारता है जिससे बहाव में बाधा आती है।

नानाखेड़ी के वर्तमान पुल में करीब चार चार वर्गमीटर की सिर्फ पांच ओपनिंग हैं। जो भारी बारिश के दौरान यहां तीन दिशाओं से आने वाली बाढ़ के पानी की निकासी के लिए काफी कम है। इसी तरह डाउन स्ट्रीम में भी नाले की चौड़ाई कम होने के साथ साथ तेज घुमाव है। जिससे पानी पहले सामने ठोकर मारता है। यहां डाउन स्ट्रीम में नानाखेड़ी मंडी की ओर से दो पाइप से आने वाला पानी मिलता है। इस ओर बहाव क्षेत्र के दोनों मुहानों पर पक्के निर्माण है। यहां भी गहरीकरण और चौड़ीकरण की जरूरत है।

ये सारे सुधार किए बिना इस इलाके में बाढ़ की समस्या से स्थाई राहत मिलना नामुमकिन है। वैसे तो तकनीकी सुझाव के लिए जिला प्रशासन ने वर्तमान के काबिल अफसरों, तकनीकि जानकारों के साथ साथ 12 रिटायर्ड इंजीनियरों की टीम भी बनाई है। उम्मीद है कि मुझ अनपढ़ की बात ये काबिल लोग समझ सकेंगे।


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