गुना: गुनिया नाले पर अतिक्रमण का खेल, स्टॉप डैम तोड़े गए—हर बारिश में खतरा बढ़ा
गुना (आरएनआई) गुनिया नाले के बहाव क्षेत्र में स्टॉप डैम के सहारे निर्मित इस मकान देखिए। स्टेट टाइम में निर्मित ऐसे स्टॉप डैम में से कुछ तो नगरपालिका प्रशासन ने ही पूर्व तोड़ दिए हैं। कुछ को जनता ने नुकसान पहुंचा देता। अब इस वीडियो को देखिए। स्टॉप डैम की दीवार सिर्फ वहां तक बची है जहां तक नाले के बहाव क्षेत्र को अवरूद्ध कर अतिक्रमण कर लाइन से मकान बनाए गए हैं।
बाकी का स्टॉप डैम तोड़कर हटाया जा चुका है। रहवासी बताते हैं कि यहां वर्षो से नाले की जमीन पर अतिक्रमण की तैयारी की जाती रही। बहाव को भी मोड़कर अवरुद्ध कर पौधा लगाया गया जो अब पेड़ बन गया है। फिर वहां भी मकान बना लिए गए। इस तरह नाले के बहाव को अवरूद्ध कर दिया गया। अब जरा सी बारिश में नाला उफन जाता है।
अतिक्रमणकारी भी इतने अभ्यस्त हो चुके हैं कि बारिश में मकान की तलमंजिल खाली कर पानी से खराब होने वाला सामान पहली मंजिल पर रख देते हैं। ताकि बाढ़ का पानी घरों में घुसे तो नुकसान न हो। शासन से मुआवजा इतना मिल ही जाता है कि उससे सफाई रंगाई पुताई और छुटपुट मरम्मत भी की जा सकती है।
यदि सांसद एक पदयात्रा शहर के तीनों बड़े नालों के शहरी क्षेत्र में ही कर लें तो पाएंगे कि ग्वालियर स्टेट टाइम में जल संरक्षण के लिए निर्मित संरचनाओं को किस कदर नुकसान पहुंचाया गया है। स्टेट टाइम में सिंहवासा तालाब से जब स्वच्छ जल बहकर गुनिया में आता था तब इसे लोग नदी ही कहते थे। कैंट (मिलिट्री छावनी) में सेना के सामान्य कामकाज में आवश्यक और उनके घोड़ों के पानी की व्यवस्था वर्ष भर इन्हीं स्टॉप डैम की बदौलत ही होती थी।
बाद में नगरपालिका ने शहर की गलियों के ड्रेनेज इस स्वच्छ गुनिया नदी में छोड़ दिए। जिससे ये नदी गंदा नाला बन गई। अब हर बारिश में ये गुनिया अपने मूल अस्तित्व को तलाशती है और पुराने स्वरूप में आना चाहती है। उसकी राह में जो रोड़ा बनते हैं उन्हें दंड भी दे जाती है। ऐसे अतिक्रमण हटाना ही चाहिए।
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