क्रांति का स्वागत, पर गुरु रह गए गुमनाम: छतरपुर की बेटी को निखारने वाले कोच राजीव बिल्थरे को नहीं मिला सम्मान
छतरपुर (आरएनआई) चमकता हीरा सबने देखा लेकिन उस हीरे को तराशने वाला, निस्वार्थ मेहनत करने वाला जौहरी कहीं गुम हो गया। शुक्रवार को छतरपुर शहर में क्रांति गौड़ का भव्य स्वागत हुआ और होना ही चाहिए था लेकिन इस कार्यक्रम की गरिमा और भव्यता कहीं अधिक बढ़ जाती अगर इस हीरे को तराशने वाले जौहरी राजीव बिल्थरे जी भी साथ होते। इस गौरवमय क्षणों में शिष्या के साथ गुरु का भी ध्यान प्रशासन को रखना चाहिए था ।
2017 में जब क्रांति गौड़ ने छतरपुर में क्रिकेट खेलना शुरू किया न तो जूते और किट खरीदने के पैसे थे और न ही कोच को देने के कोच राजीव बिलथरे ने क्रांति में प्रतिभा देखी। उन्हें निशुल्क कोचिंग दी और साथ ही अच्छे जूते खरीदने के लिए सोलह सौ रुपए भी दिए।
एक अच्छा गुरु वही है जो अपने शिष्य में प्रतिभा देखे और उस प्रतिभा को तराशने के लिए खुद का जीवन समर्पित कर दे। राजीव बिलथरे ने जिस पैनी नजर से क्रांति की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें सबसे पहले आगे बढ़ने का मौका दिया। यदि वह उस समय क्रांति को यह अवसर न देते तो आज छतरपुर की बेटी क्रांति भारतीय क्रिकेट टीम में जीत की क्रांति नहीं लिख पाती।
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