कोलकाता हाईकोर्ट की टिप्पणी: 'जमीन के कागजात भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं', वैध दस्तावेज पेश करने के दिए निर्देश
कोलकाता हाईकोर्ट ने नागरिकता से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल जमीन के कागजात किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं हो सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारत में अचल संपत्ति का मालिक होना नागरिकता सिद्ध करने का आधार नहीं माना जा सकता।
यह टिप्पणी बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में प्रवेश के आरोप में गिरफ्तार नासिर मोल्ला से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की गई। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में जमीन से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर भारतीय नागरिक होने का दावा किया गया था। इस पर अदालत ने कहा कि विदेशी नागरिक भी निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत भारत में अचल संपत्ति से जुड़े अधिकार रख सकते हैं, इसलिए केवल भूमि के दस्तावेज नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि गिरफ्तार व्यक्ति ने पूछताछ के दौरान स्वयं को विदेशी नागरिक बताया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से भारतीय नागरिकता के समर्थन में वैध और प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अब तक प्रस्तुत दस्तावेजों से भारतीय नागरिकता स्थापित नहीं होती। हालांकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ता को एक और अवसर देते हुए 20 जुलाई तक शपथपत्र के साथ नागरिकता संबंधी वैध दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाल के समय में नागरिकता से जुड़े मामलों में दस्तावेजों की वैधता पर न्यायालयों ने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। इससे पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट भी एक मामले में पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पारिवारिक दस्तावेज और जमीन के कागजात जैसे दस्तावेजों को अकेले नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं मान चुका है। अदालतों ने यह भी स्पष्ट किया है कि नागरिकता साबित करने का दायित्व संबंधित व्यक्ति पर ही होता है और अंतिम निर्णय मामले के तथ्यों तथा प्रस्तुत वैध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।
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