इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NCERT को झटका दिया: स्कूल पाठ्यक्रम में जातिगत भेदभाव रोकने की सिफ़ारिश
इलाहाबाद (आरएनआई) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल पाठ्यक्रमों में जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के खतरों पर विशेष सामग्री शामिल करने का आदेश दिया है। यह आदेश NCERT के उन पाठ्यपुस्तकों पर प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया है, जिनमें जाति व्यवस्था को सही ठहराने वाले अंश शामिल हैं।
अदालत के जस्टिस विनोद दिवाकर ने 16 सितंबर को यह निर्देश दिया। आदेश में कहा गया कि स्कूलों में छात्रों को जातिगत समानता और सामाजिक न्याय के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए पाठ्यक्रम में विशेष मॉड्यूल शामिल किए जाने चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि जबकि सरकार जाति-आधारित असमानताओं को दूर करने के लिए सकारात्मक कदम उठा रही है, लेकिन सामाजिक भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करने के लिए राष्ट्रव्यापी जागरूकता कार्यक्रम की आवश्यकता है।
यह मामला इस संदर्भ में आया कि पुलिस ने अवैध शराब ले जाने के आरोप में एफआईआर दर्ज करते समय आरोपियों की जाति का उल्लेख किया था। अदालत ने पुलिस को जाति का उल्लेख न करने का निर्देश भी दिया।
NCERT ने हाल ही में विभिन्न कक्षाओं के लिए नई पाठ्यपुस्तकें तैयार की हैं। सातवीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब “Exploring Society: India and Beyond” में जाति व्यवस्था का बचाव करते हुए इसे लचीली और भारतीय समाज की स्थिरता के लिए जरूरी बताया गया है। किताब में वर्णों और जातियों का ऐतिहासिक विवरण देते हुए कहा गया है कि प्रारंभिक काल में यह व्यवस्था लचीली थी, लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान कठोर हो गई।
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और सामाजिक न्याय मंच के अध्यक्ष हंसराज सुमन ने कहा कि NCERT को जाति को असमान व्यवस्था के रूप में स्पष्ट रूप से दिखाते हुए पर्याप्त जागरूक सामग्री शामिल करनी चाहिए थी।
अदालती आदेश ऐसे समय में आया है जब NCERT सभी कक्षाओं के लिए नई किताबें जारी कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस आदेश के बाद पाठ्यक्रम में जाति और सामाजिक समानता पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।
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