आम चुनाव में जीत के बाद भी पूर्ण बहुमत से पीछे मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी, महज तीन सीटों से रही पीछे
कनाडा आम चुनाव में मतदान के बाद मतगणना एजेंसी इलेक्शन कनाडा ने सभी मतपत्रों की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसमें मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी बहुमत से केवल तीन सीटें पीछे रह गई है। अब उन्हें कानून पारित करने के लिए किसी अन्य छोटी पार्टी से मदद लेनी होगी।
टोरंटो (आरएनआई) कनाडा में हुए आम चुनाव में जीत के बाद भी पीएम मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी संसद में पूर्ण बहुमत हासिल करने से चूक गई। लिबरल पार्टी बहुमत के आंकड़े से महज तीन सीटें पीछे रह गई है। ऐसे अब लिबरल पार्टी को किसी भी कानून को पारित कराने के लिए छोटी पार्टी का साथ लेना होगा।
कनाडा आम चुनाव में मतदान के बाद मतगणना एजेंसी इलेक्शन कनाडा ने सभी मतपत्रों की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसमें मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी बहुमत से केवल तीन सीटें पीछे रह गई है। अब उन्हें कानून पारित करने के लिए किसी अन्य छोटी पार्टी से मदद लेनी होगी। अभी यह तय नहीं है कि लिबरल पार्टी पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो को समर्थन देने वाली एनडीपी से समर्थन लेगी या फिर फ्रेंच भाषी क्यूबेक की अलगाववादी पार्टी का साथ लेगी।
संसद की 343 सीटों में से लिबरल्स को 169 सीटें, विपक्षी कंजर्वेटिव्स को 144 सीटें जीतने का अनुमान था। जबकि अलगाववादी ब्लॉक क्यूबेकॉइस पार्टी को 22 सीटें, प्रगतिशील न्यू डेमोक्रेट्स को सात और ग्रीन्स को एक सीट मिलने की उम्मीद थी। कुछ जिलों में पुनर्मतगणना की उम्मीद थी। चुनाव कनाडा ने कहा कि संघीय चुनाव में 68.5 प्रतिशत पात्र मतदाताओं ने मतदान किया। जो 1993 के बाद से सबसे अधिक मतदान है।
आम चुनाव में जीत के बाद पीएम मार्क कार्नी ने विजय भाषण में कनाडाई लोगों को चेताया था। कार्नी ने कहा था कि ट्रंप हमें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए हमें सचेत रहने की जरूरत है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से कनाडा और अमेरिका ने जिस पारस्परिक रूप से लाभकारी प्रणाली को साझा किया था, वह अब खत्म हो चुकी है। हम अमेरिकी विश्वासघात के सदमे से उबर चुके हैं, लेकिन हमें उससे मिले सबक कभी नहीं भूलना चाहिए। जैसा कि मैं महीनों से चेतावनी दे रहा हूं, अमेरिका हमारी जमीन, हमारे संसाधन, हमारा पानी, हमारा देश चाहता है। ये बेकार की धमकियां नहीं हैं। राष्ट्रपति ट्रंप हमें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अमेरिका हम पर कब्जा कर सके। ऐसा कभी नहीं होगा, कभी नहीं होगा। लेकिन हमें इस वास्तविकता को भी पहचानना होगा कि हमारी दुनिया मौलिक रूप से बदल गई है।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि कनाडा के चुनाव राष्ट्रपति ट्रंप की कनाडा को अमेरिका का प्रिय 51वां राज्य बनाने की योजना को प्रभावित नहीं करेंगे। जबकि कार्नी के कार्यालय ने एक बयान में कहा कि कार्नी ने ट्रंप से बात की और दोनों नेता कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के आपसी बेहतरी के लिए स्वतंत्र, संप्रभु राष्ट्रों के रूप में एक साथ काम करने के महत्व पर सहमत हुए। दोनों नेताओं ने निकट भविष्य में व्यक्तिगत रूप से मिलने पर सहमति जताई।
आम चुनाव में विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी की करारी हार हुई है। इसके साथ ही पार्टी के नेता पियरे पॉइलिवर भी हार गए। मैकगिल विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डैनियल बेलैंड ने कहा कि पॉइलिवर को बिना सीट के कंजर्वेटिव नेता बने रहने से कोई नहीं रोक सकता, लेकिन अगर वह बने रहने का फैसला करते हैं, तो उन्हें दूसरे जिले से चुनाव लड़ना होगा। शायद किसी सुरक्षित कंजर्वेटिव जिले से संसद के किसी कंजर्वेटिव सदस्य से इस्तीफा मांगकर। उन्होंने कहा कि जब आपकी अपनी पार्टी के कुछ लोग सोचते हैं कि आप ही मुख्य कारण हैं कि पार्टी जीत नहीं पाई, तो अपनी सीट खोना पॉइलिवर के लिए एक स्पष्ट मुद्दा है। इसके अलावा जब संसद फिर से बैठेगी, तो हाउस ऑफ कॉमन्स में आधिकारिक विपक्ष के नेता का न होना कंजर्वेटिवों के लिए स्पष्ट रूप से एक समस्या होगी।
पीएम मार्क कार्नी और लिबरल्स ने चुनाव तो जीत लिया है, लेकिन उनके सामने कठिन चुनौतियां हैं। संसद में बहुमत हासिल करने में विफल होने के कारण लिबरल्स को एक छोटी पार्टी पर निर्भर रहना होगा। ट्रूडो की लिबरल पार्टी चार साल तक सत्ता में बने रहने के लिए न्यू डेमोक्रेट्स पर निर्भर थी, लेकिन इस बाद इसका प्रदर्शन खराब रहा। इसके नेता जगमीत सिंह ने कहा कि वह आठ साल तक सत्ता में रहने के बाद पद छोड़ रहे हैं।
वहीं फ्रेंच भाषी क्यूबेक की एक अलगाववादी पार्टी ब्लॉक क्यूबेकॉइस जो तीसरे स्थान पर है, और कनाडा से स्वतंत्रता चाहती है। ब्लॉक क्यूबेकॉइस के नेता यवेस-फ्रेंकोइस ब्लैंचेट ने कहा कि अगर सरकार अल्पमत में आती है तो वे एक साल तक उसके साथ काम करने के लिए तैयार हैं। क्यूबेक के लोग और कनाडा के लोग संघीय संसद में अस्थिरता नहीं चाहते हैं।
इसके अलावा अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध और ट्रंप के साथ रिश्ते के अलावा कनाडा जीवन-यापन की लागत के संकट से भी जूझ रहा है। और इसके 75 प्रतिशत से अधिक निर्यात अमेरिका को जाते हैं, इसलिए ट्रंप की टैरिफ धमकी और उत्तरी अमेरिकी वाहन निर्माताओं को कनाडा के उत्पादन को दक्षिण की ओर ले जाने की उनकी इच्छा अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है।
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