वॉशिंगटन पोस्ट में बड़े पैमाने पर छंटनी, शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर भी प्रभावित
न्यूयॉर्क (आरएनआई) दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में शुमार द वॉशिंगटन पोस्ट ने हाल ही में एक व्यापक पुनर्गठन के तहत अपने कर्मचारियों में बड़ी छंटनी की है, जिसने वैश्विक पत्रकारिता जगत को हिला दिया है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर अखबार की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग टीम और अन्य महत्वपूर्ण विभागों पर पड़ा है।
इस छंटनी का एक खास पहलू यह भी है कि भारतीय राजनीतिक परिवार से जुड़ा एक नाम भी इससे प्रभावित हुआ है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार ईशान थरूर भी उन्हीं में से एक हैं जिनकी नौकरी इस फैसले के तहत चली गई। ईशान थरूर द वॉशिंगटन पोस्ट से पिछले 12 वर्षों से जुड़े थे और उन्होंने 2017 में शुरू किया गया अपना प्रसिद्ध कॉलम ‘वर्ल्ड व्यू’ लंबे समय तक लिखते रहे, जिसे लाखों पाठकों द्वारा पसंद किया गया।
ईशान ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएँ साझा करते हुए लिखा कि उनके लिए यह बहुत दुखद अनुभव है। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों में जिन अंतरराष्ट्रीय संवाददाताओं और संपादकों के साथ उन्होंने काम किया, उनसे अलग होना उनके लिए बेहद कठिन रहा। उन्होंने उन सभी क्षणों और अनुभवों को सम्मानजनक बताया जो उनके पत्रकारिता के सफर का अहम हिस्सा रहे।
इस भारी छंटनी का असर उन अनुभवी पत्रकारों पर भी पड़ा है जो युद्ध-क्षेत्रों और संकटग्रस्त इलाकों से रिपोर्टिंग कर रहे थे। कई ऐसे वरिष्ठ संवाददाता हैं जिनकी सेवाएँ भी अब समाप्त कर दी गई हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपनी रिपोर्ट से पाठकों को दुनिया की खबरें सही तरीके से पहुँचाईं।
सिर्फ अंतरराष्ट्रीय टीम ही नहीं, बल्कि अखबार की स्पोर्ट्स डेस्क को भी बंद कर दिया गया है। इससे स्पोर्ट्स पत्रकारों के साथ-साथ उन पाठकों पर भी असर पड़ा है जो गहन और विश्लेषणात्मक खेल रिपोर्टिंग पढ़ते हैं।
वॉशिंगटन पोस्ट प्रबंधन के अनुसार यह निर्णय एक बड़े पुनर्गठन का हिस्सा है, जिसके तहत अखबार को बदलते मीडिया वातावरण में स्थिर और प्रभावी बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। प्रबंधन के इस कदम को कुछ मीडिया विशेषज्ञों ने आवश्यक बताया है, जबकि कई पत्रकारों और विश्लेषकों का मानना है कि इससे मीडिया की गहराई और सशक्त रिपोर्टिंग पर असर पड़ेगा।
पूर्व कार्यकारी संपादक और अन्य वरिष्ठ पत्रकारों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएँ साझा करते हुए कहा है कि यह वाकई में अखबार के इतिहास के काले दिनों में से एक है। वॉशिंगटन पोस्ट गिल्ड यानी कर्मचारियों की यूनियन ने भी मालिक और प्रबंधन से अपील की है कि वे पत्रकारिता के मिशन में निवेश जारी रखें, क्योंकि बिना अनुभवी पत्रकारों के अखबार का अस्तित्व ही मुश्किल है।
इस छंटनी की खबर ने न केवल समाचार पत्र के भीतर, बल्कि विश्वभर के मीडिया समुदाय में भी गहरी संवेदना और बहस को जन्म दिया है। पत्रकारिता के आधार, रिपोर्टिंग की पहुंच, और भविष्य की दिशा पर सवाल उठते हुए यह बदलाव मीडिया के बदलते युग में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया है।
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