अमेरिकी अदालत का बड़ा आदेश: बायजूस के संस्थापक बायजू रवींद्रन को 1 अरब डॉलर से अधिक चुकाने का निर्देश
नई दिल्ली (आरएनआई) एड-टेक कंपनी बायजूस को बड़ा झटका देते हुए अमेरिका की डेलावेयर बैंकरप्सी कोर्ट ने कंपनी के संस्थापक बायजू रवींद्रन को 1.07 अरब डॉलर से अधिक की राशि भुगतान का आदेश दिया है। अदालत ने रवींद्रन को बायजूस की अमेरिकी वित्तीय सहायक कंपनी ‘बायजूस अल्फा’ से जुड़े धन के स्थानांतरण और छुपाने के मामले में व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया। यह फैसला उस स्थिति में सुनाया गया जब अदालत के बार-बार के निर्देशों के बावजूद रवींद्रन पेश नहीं हुए और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
यह आदेश ‘डिफॉल्ट जजमेंट’ के रूप में जारी किया गया, जो आमतौर पर तब लागू होता है जब कोई पक्ष अदालत की प्रक्रिया में शामिल नहीं होता या उसके आदेशों की अवहेलना करता है।
मामला 2021 में डेलावेयर में पंजीकृत बायजूस अल्फा से जुड़ा है, जिसे वैश्विक ऋणदाताओं के एक समूह से 1.2 अरब डॉलर के टर्म लोन को प्रबंधित करने के लिए एक विशेष इकाई के रूप में बनाया गया था। अदालत के अनुसार बायजूस अल्फा का कोई प्रत्यक्ष व्यवसायिक संचालन नहीं था और यह मुख्यतः ऋण राशि को संभालने वाली इकाई के रूप में कार्य कर रही थी।
अदालत में दायर दस्तावेजों के मुताबिक, इस धन में से लगभग 533 मिलियन डॉलर मियामी स्थित छोटे हेज फंड ‘कैमशाफ्ट कैपिटल’ में स्थानांतरित किए गए और बाद में इंस्पाइलीन सहित अन्य संबद्ध संस्थाओं के जरिए ऑफशोर ट्रस्ट में पहुंच गए। इन धनराशियों में से कोई भी वापस बायजूस अल्फा में नहीं लौटी।
फैसले के बाद बायजू रवींद्रन ने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा कि वे इस आदेश को चुनौती देंगे। उनका कहना है कि अदालत ने इस निर्णय को जल्दबाजी में सुनाया, जिससे उन्हें अपनी बात रखने और बचाव प्रस्तुत करने का अवसर नहीं मिल सका। बयान में यह भी कहा गया कि अदालत ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर विचार नहीं किया।
रवींद्रन की ओर से यह भी दावा किया गया कि ग्लास ट्रस्ट सहित संबंधित पक्ष यह जानते थे कि अल्फा के ऋण की राशि का इस्तेमाल उनके या किसी संस्थापक के व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं हुआ, बल्कि इसका उपयोग थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड, यानी बायजूस की मूल कंपनी, के संचालन के लिए किया गया।
कंपनी पहले से ही वित्तीय संकट, कानूनी चुनौतियों और वैश्विक स्तर पर निवेशकों की बढ़ती जांच का सामना कर रही है और अमेरिकी अदालत का यह आदेश कंपनी और उसके संस्थापक पर दबाव और बढ़ा सकता है।
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