अफसरों की पैसों की भूख से बरबाद हुआ प्यारा नगर शिवपुरी
शिवपुरी (आरएनआई) शिवपुरी में प्रशासनिक अफसरों की कुंभकरणी नींद ने पूरे शहर को बर्बादी की कगार पर ला खड़ा किया है। जनता हर साल बारिश आते ही डरी-सहमी रहती है, क्योंकि प्रशासन की लापरवाही और कुछ रिश्वतखोर राजस्व अफसरों की धनलोलुपता ने पूरे शहर में अवैध कॉलोनियों का जाल बिछा दिया है। खुलेआम नालों पर बस्तियाँ बस गईं, बिल्डिंग्स तन गईं, और अफसर अपनी जेबें भरने में मस्त रहे। जिन रास्तों से कभी बारिश का पानी आसानी से निकल जाता था, वहां अब सीमेंट-कंक्रीट के जंगल उग आए हैं। हर गली, हर मोहल्ले में पानी की निकासी का कोई रास्ता ही नहीं बचा।
बरसात आते ही हालात ऐसे हो जाते हैं कि लोगों के घर तालाब में तब्दील हो जाते हैं। लोग रात-रात भर बाल्टी और मग्गे से पानी निकालने को मजबूर हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई परेशान है लेकिन प्रशासनिक अमला चैन की नींद सो रहा है। कागजों में सबकुछ दुरुस्त दिखाने वाले ये अफसर जमीनी हकीकत से पूरी तरह अनजान या यूँ कहिए, बेपरवाह बने बैठे हैं।
सबसे शर्मनाक बात ये है कि जिन लोगों को शहर के हित में काम करना था, वही लोग अपनी जेबें भरने के लिए शहर को जलमग्न करवा रहे हैं। नालों के ऊपर अवैध निर्माण की इजाजत देकर उन्होंने न सिर्फ कानून का मजाक उड़ाया है, बल्कि पूरे शिवपुरी को डूबने के लिए छोड़ दिया है। अब जब पानी घरों में घुस रहा है, बस्तियों में बीमारी फैलने का डर बढ़ रहा है, तब भी ये अफसर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। शिवपुरी की जनता आखिर कब तक इन निकम्मे, रिश्वतखोर और जिम्मेदारी से भागने वाले अफसरों की वजह से भुगतती रहेगी?
जरूरत है कि ऐसे अफसरों की जवाबदेही तय हो और जो भी नालों पर बस्तियाँ बसाने के जिम्मेदार हैं, उन पर सख्त कार्रवाई हो। वरना ये शहर एक दिन पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा और जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ ये प्रशासनिक अफसर और उनके सरपरस्त होंगे।
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