अतिवृष्टि एवं बाढ़ से बचाव की तैयारियों के संबंध में दिशा निर्देश जारी
गुना (आरएनआई) कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर द्वारा अतिवृष्टि एवं बाढ़ से निपटने के लिये पूर्व से तैयारी के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सिविल सर्जन एवं समस्त खंड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अतिवृष्टि एवं असामान्य रूप से निरंतर वर्षा/ बाढ़ होने के कारण संभावित जल जनित रोग जैसे - उल्टी, दस्त, पेचिश, पीलिया, टाइफाइड, अमीबायसिस, जियार्डियासिस, कृमि संक्रमण एवं हैजा आदि फैलने की तीव्र संभावना होती है। बाढ़ की स्थिति निर्मित होने पर संबंधित क्षेत्र में आबादी को चिकित्सकीय सेवा प्रदान की जाएं। इसके अंतर्गत ब्लॉक में बाढ़ संभावित क्षेत्र के समस्या मूलक ग्रामों तथा दुर्गम क्षेत्रों को चिन्हित किया जाए तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों की निगरानी हेतु कंट्रोल रूम की स्थापना स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर की जाए।
ब्लॉक में किसी वरिष्ठ अधिकारी को नोडल अधिकारी नामांकित कर उनका नाम व फोन नंबर जिले में प्रशासन द्वारा स्थापित कंट्रोल रूम के बाहर प्रदर्शित किए जाएं आपदा प्रबंधन हेतु जिले में नोडल अधिकारी मनोनीत करते हुए नोडल अधिकारी के माध्यम से मैदानी अमलों यथा आशा, एएनएम,एमपीडब्ल्यू, सीएचओ, एलएचव्ही तथा पुरुष सुपरवाइजर का मूलभूत चिकित्सा उपचार तथा रोगियों के वर्गीकरण विषयों पर उन्मुखीकरण किया जाए तथा प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए।
बाढ़ संभावित क्षेत्रों में अस्थाई राहत शिविरों हेतु मेडिकल टीम का गठन कर चिकित्सा व्यवस्था एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम की पर्याप्त व्यवस्था संबंधी नियोजन किया जाए। साथ ही सुनिश्चित करें कि आवश्यक चिकित्सा सेवाएं जैसे टीकाकरण सेवाएं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का निर्बाध संचालन जारी रहे। बाढ़ संभावित इलाकों में एंबुलेंस सेवाओं की आवश्यकता अनुसार आकलन किया जाए। वरिष्ठ नागरिकों एवं मधुमेह, उच्च रक्तचाप, लिवर, किडनी, स्वशन रोग से पीड़ित लोगों की निगरानी की व्यवस्था बनाई जाए। समस्त अस्पतालों में पेयजल विद्युत आदि की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। भू-तल / तहखानों में बने मेडिकल स्टोर सहित चिकित्सा सेवाओं को क्षति से बचाव के लिए उच्च मंजिला या अन्य भवनों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई जाए।
अतिवृष्टि से संभावित जल जनित वेक्टर जनित बीमारियों के उपचार हेतु आशा कार्यकर्ता,एएनएम तथा सीएचओ के पास समस्त आवश्यक औषधियां/ सामग्री यथा ओआरएस, सिरप मेट्रोनिडाजॉल,टैबलेट/सिरप मेट्रोक्लेपामाईड, टेबलेट/ सिरप एंटीबायोटिक्स, आई व्ही फ्लूइड,एंटी डायरियल, ब्लीचिंग पाउडर आदि की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। आपात स्थिति में त्वरित उपचार उपलब्ध कराने हेतु सहयोगी संस्थाएं, गैर सरकारी संस्थान तथा सिविल सोसाइटी की प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित कर पूर्व तैयारी रखी जाए। आवश्यकतानुसार अन्य विभागों जैसे- वन, पुलिस, लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग,राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग,शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, मौसम विभाग आदि से समन्वय स्थापित कर बाढ़ संभावित क्षेत्र के लिए महामारी नियंत्रण हेतु समन्वित योजना बनाई जाए। रैपिड रिस्पांस दलों से समन्वय की कार्रवाई मनोनीत आपदा प्रबंधन नोडल अधिकारी द्वारा सुनिश्चित करें। जिला व विकासखंड स्तर पर आपात स्थिति में प्रशिक्षित चिकित्सा दलों को रैपिड रिस्पांस दल के तौर पर सचेत रखा जाए। साथ ही वर्षा ऋतु में होने वाली संक्रामक बीमारियों हेतु ग्राम आरोग्य केंद्रों पर निर्धारित दवाइयां/ सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
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