36 साल बाद फिर गूंजेगी रामनवमी की आरती, श्रीनगर के रघुनाथ मंदिर के खुले श्रद्धा के द्वार
श्रीनगर (आरएनआई)। कश्मीर घाटी में आस्था और साझा सांस्कृतिक विरासत का एक ऐतिहासिक पल सामने आया है। हब्बाकदल स्थित प्राचीन रघुनाथ मंदिर में लगभग 36 वर्षों बाद रामनवमी का पर्व मनाया जा रहा है और मंदिर के द्वार आधिकारिक रूप से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद से वीरान पड़े इस मंदिर में एक बार फिर पूजा-अर्चना की शुरुआत ने घाटी में बदलते माहौल की नई तस्वीर पेश की है।
श्रीनगर के डल हसन यार इलाके में झेलम नदी के किनारे स्थित यह मंदिर भगवान श्रीराम को समर्पित है और पारंपरिक शिखर शैली में निर्मित है। कभी यह स्थान कश्मीर में रामनवमी के सबसे बड़े आयोजनों का केंद्र हुआ करता था। वर्षों की खामोशी के बाद अब यहां फिर से श्रद्धा की रौनक लौटती दिख रही है।
मंदिर के पुनरुद्धार का कार्य वर्ष 2020 में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया गया था, जिस पर अब तक करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। हालांकि निर्माण कार्य अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन इस रामनवमी पर विशेष हवन और पूर्ण आरती का आयोजन किया जा रहा है। हवन कुंड तैयार कर लिया गया है, जबकि मूर्ति स्थापना का कार्य निर्माण पूरा होने के बाद किया जाएगा।
रघुनाथ मंदिर समिति हब्बाकदल के अध्यक्ष भारत रैना के अनुसार, आतंकवाद के दौर और कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद से इस मंदिर में रामनवमी नहीं मनाई गई थी। पिछले कुछ वर्षों से मंदिर के जीर्णोद्धार के प्रयास जारी थे, जो अब साकार होते दिख रहे हैं।
इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण 1835 में महाराजा गुलाब सिंह ने शुरू कराया था, जिसे बाद में महाराजा रणबीर सिंह ने 1860 के आसपास पूरा कराया। कुछ ऐतिहासिक अभिलेखों में इसकी पूर्णता वर्ष 1875 भी बताई जाती है।
इस मौके को कश्मीर में शांति और सामान्य स्थिति की वापसी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह पहल घाटी में मेल-मिलाप और विश्वास बहाली का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में कश्मीरी पंडित सम्मान और सुरक्षा के साथ अपनी जड़ों की ओर लौट सकेंगे।
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