दिल्ली विधानसभा ने ब्रिटिश-युग के रिकॉर्ड आम जनता और विद्वानों के लिए खोले

Thursday, May 28, 2026 - 19:20
Updated: 2 months ago
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दिल्ली विधानसभा ने ब्रिटिश-युग के रिकॉर्ड आम जनता और विद्वानों के लिए खोले

नई दिल्ली (आरएनआई) दिल्ली विधानसभा ने आज ब्रिटिश-युग के विधायी रिकॉर्ड आम जनता और विद्वानों के लिए खोल दिए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिल्ली विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका 'विधान-चेतना' का पहला अंक जारी किया। इसके साथ ही उन्होंने 'केंद्रीय विधानसभा की कार्यवाही' (1924–1930) के 89 खंडों में प्रकाशित संग्रह को भी जारी किया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर बोलते हुए श्री बिरला ने कहा कि दिल्ली विधानसभा ने इन दुर्लभ बहसों और कार्यवाहियों के व्यवस्थित प्रकाशन के माध्यम से भारत के विधायी इतिहास को संरक्षित करने में एक महत्वपूर्ण कमी को पूरा किया है।

केंद्रीय विधानसभा के पहले भारतीय अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए श्री बिरला ने कहा कि पटेल ने ब्रिटिश शासन के दौरान भी सदन की गरिमा, अध्यक्ष पद की निष्पक्षता और अध्यक्ष कार्यालय की पवित्रता को दृढ़ता से बनाए रखा।

भारतीय लोकतंत्र की मजबूती पर जोर देते हुए श्री बिरला ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की जड़ें चर्चा, संवाद और आम सहमति में निहित हैं, और आज देश लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक वैश्विक आदर्श के रूप में उभरा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दिल्ली विधानसभा भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी और एक ऐसे राष्ट्र के निर्माण में योगदान देगी जहाँ राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर और सर्वोपरि हो।

श्री रिजिजू ने कहा, "यदि विधायी संस्थाएँ कमजोर होती हैं, तो लोकतंत्र भी कमजोर होता है। संसद और विधानसभाओं की गरिमा की रक्षा करना प्रत्येक निर्वाचित प्रतिनिधि का सामूहिक दायित्व है।" एल.एस.

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