इंटरव्यू लेना बना ‘गुनाह’? तड़के 4 बजे पत्रकार हेम भट्ट को उठा ले गई पुलिस, धामी सरकार पर गंभीर सवाल
उत्तराखंड में पत्रकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हेम भट्ट को कथित तौर पर आज सुबह करीब चार बजे उनके घर से पुलिस द्वारा उठाए जाने की सूचना ने मीडिया जगत में आक्रोश पैदा कर दिया है।
जय भारत टीवी के फेसबुक पेज पर दावा किया गया है कि हेम भट्ट लापता हैं। आरोप है कि पुलिस तड़के उनके घर पहुंची, उनके साथ मारपीट की और उनकी पत्नी के साथ भी अभद्र व्यवहार किया। सबसे गंभीर बात यह है कि ये आरोप किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि भाजपा विधायक अरविंद पांडेय ने लगाए हैं।
अरविंद पांडेय का कहना है कि यह कार्रवाई उनके इंटरव्यू के कारण की गई। ऐसे में सवाल सीधे पुष्कर सिंह धामी सरकार पर उठ रहे हैं कि क्या अब पत्रकारों का इंटरव्यू लेना भी सत्ता के खिलाफ माना जाएगा?
राज्य के पुलिस महानिदेशक और देहरादून पुलिस से भी कई सवाल पूछे जा रहे हैं। आखिर ऐसा कौन सा मामला था कि एक पत्रकार के घर सुबह चार बजे दबिश दी गई? क्या हेम भट्ट कोई खतरनाक अपराधी हैं, जिनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई जरूरी थी?
हेम भट्ट पर यह कथित हमला पहली बार नहीं बताया जा रहा। इसी साल फरवरी में भी उन पर घर लौटते समय हमला हुआ था। उस मामले को पुलिस ने जल्दबाजी में रोड रेज बताकर बंद कर दिया था। हालांकि हेम भट्ट ने तब भी आरोप लगाया था कि हमले के पीछे सत्ता से जुड़ी नाराजगी थी।
गौरतलब है कि तड़के उठाए जाने की खबर के घंटों बाद तक देहरादून पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। इस चुप्पी ने पूरे मामले को और विवादास्पद बना दिया है।
पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए हेम भट्ट की तत्काल रिहाई, निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में पत्रकारों को डराने या दबाने की कोशिश बेहद खतरनाक संकेत है।
भड़ास न्यूज़
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