संयुक्त राष्ट्र का संदेश: इस्राइल-फलस्तीन विवाद का हल सिर्फ़ दो-राज्य समाधान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी अपने संबोधन में दोहराया कि फलस्तीन को राज्य का दर्जा देना 'एक अधिकार है, इनाम नहीं', और इसे नकारना चरमपंथियों को बढ़ावा देगा। उन्होंने चेतावनी दी कि 'यदि दो-राज्य समाधान नहीं हुआ, तो मध्य पूर्व में कभी शांति नहीं होगी।'

Sep 23, 2025 - 15:02
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संयुक्त राष्ट्र का संदेश: इस्राइल-फलस्तीन विवाद का हल सिर्फ़ दो-राज्य समाधान

न्यूयॉर्क (आरएनआई) न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि इस्राइल और फलस्तीन के बीच दशकों पुराने संघर्ष को सुलझाने का केवल एक ही तरीका है- दो-राज्य समाधान। उन्होंने कहा, 'हम मानते हैं कि मौजूदा चुनौतियों का हल तभी निकल सकता है जब इस्राइल और फलस्तीन, दो स्वतंत्र देशों के रूप में, साथ-साथ शांति और सुरक्षा के साथ रहें।'

इस बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फलस्तीन को औपचारिक रूप से राज्य के रूप में मान्यता देने की घोषणा की। इससे पहले कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन भी रविवार को यह एलान कर चुके हैं। अब तक 140 से अधिक देश फलस्तीन को मान्यता दे चुके हैं। फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों का यह कदम खास मायने रखता है क्योंकि ये दोनों जी-7 समूह और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य हैं। इमैनुएल मैक्रों ने कहा, 'यह फैसला हमास की हार है। दो-राज्य समाधान ही एकमात्र रास्ता है जिससे इस्राइल और फलस्तीन शांति से रह सकेंगे।'

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन घोषणाओं को 'आतंकवाद को इनाम' करार दिया। उन्होंने कहा, '7 अक्तूबर के हमले के बाद फलस्तीन को मान्यता देना आतंकियों को पुरस्कृत करने जैसा है। यह कभी नहीं होगा।' नेतन्याहू ने साफ कहा कि 'जॉर्डन नदी के पश्चिम में कभी फलस्तीनी राज्य नहीं बनेगा।' इस्राइली विदेश मंत्रालय ने भी इन देशों के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि शांति तभी संभव है जब फलस्तीनी प्राधिकरण आतंकवाद और भड़काऊ गतिविधियों को पूरी तरह रोके। मंत्रालय का कहना है कि 'राजनीतिक दिखावे' की बजाय देशों को हमास पर दबाव डालना चाहिए कि वह बंधकों को छोड़े और अपने हथियार डाले।

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में दो-राज्य समाधान के पक्ष में एक प्रस्ताव लाया गया था। भारत समेत 142 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया था। फलस्तीन के विदेश मंत्रालय ने कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के फैसले का स्वागत करते हुए इसे 'शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम' बताया।

न्यूयॉर्क में चल रहे संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र में महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कई अहम मुद्दों पर बयान दिया। इस दौरान दुजारिक ने कहा कि इस बार का बड़ा मुद्दा 'संयुक्त राष्ट्र में सुधार' है, ताकि यह संगठन 2025 की दुनिया के हिसाब से ज्यादा तेज, प्रभावी और प्रतिनिधित्वकारी बने। उन्होंने कहा, 'भारत संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का बहुत अहम हिस्सा है। भारत बहुपक्षवाद का मजबूत समर्थक है और महासचिव के भारत सरकार से बहुत अच्छे संबंध हैं। हमारे साथ कई भारतीय सहयोगी भी काम कर रहे हैं। भारत यूएन में एक महत्वपूर्ण आवाज है।

भारत की स्थायी सदस्यता की मांग पर उन्होंने कहा कि महासचिव सुरक्षा परिषद (यूएनएसी) में सुधार का समर्थन करते हैं। 'सुरक्षा परिषद को 1945 नहीं, बल्कि 2025 की दुनिया के हिसाब से बनाया जाना चाहिए। अब इसमें कौन से देश स्थायी सदस्य बनेंगे, यह सदस्य देशों के आपसी फैसले पर निर्भर करेगा।' वहीं पहलगाम आतंकी हमले पर दुजारिक ने कहा, 'महासचिव हर आतंकी हमले की निंदा करते आए हैं और आगे भी करते रहेंगे। हमने आतंकवाद से निपटने के लिए देशों की मदद की है, चाहे वह कानून-व्यवस्था, यात्रा प्रतिबंध या वित्तीय ट्रैकिंग के जरिए हो। आतंकवाद सीमाओं को नहीं मानता, इसलिए इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।' वहीं सीमा पार आतंकवाद पर उन्होंने कहा, 'हर देश के लिए जरूरी है कि वह अपनी सीमाओं पर नियंत्रण रखे और पड़ोसियों के साथ शांति से रहे।'

रूस-यूक्रेन युद्ध पर दुजारिक ने कहा, 'इस संघर्ष का एकमात्र हल बातचीत और कूटनीति है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यही संदेश देते रहे हैं। हम चाहते हैं कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून और यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के मुताबिक समाप्त हो।' वहीं वैश्विक व्यापार युद्ध और बढ़ते टैरिफ पर उन्होंने कहा, 'व्यापार युद्ध में किसी की जीत नहीं होती। इसका सबसे ज्यादा नुकसान विकासशील देशों को होता है।' 

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