‘बांटो और राज करो’ की राजनीति नहीं चलेगी: SIR को लेकर CM ममता बनर्जी का बड़ा बयान, बोलीं — हर असली मतदाता की करेंगे रक्षा
कोलकाता/पश्चिम बंगाल (आरएनआई): चुनाव आयोग द्वारा 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि “हर असली मतदाता के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए और देश में बांटो और राज करो की राजनीति अब नहीं चलेगी।”
ममता बनर्जी ने दी लोकतंत्र बचाने की अपील
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को अपने संबोधन में कहा — “हम नहीं चाहते कि किसी भी समुदाय या वर्ग के बीच विभाजन की राजनीति की जाए। हर असली मतदाता का लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए। लोकतंत्र के सबसे बड़े स्तंभ न्यायपालिका और मीडिया हैं, इन्हें मजबूत रखना बेहद जरूरी है।”
उन्होंने आगे कहा कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है और सभी वर्गों के एकजुट रहने से ही देश और लोकतंत्र मजबूत रह सकते हैं। अपने भाषण में उन्होंने महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का उल्लेख करते हुए कहा कि “एकता ही भारत की असली ताकत है।”
टीएमसी ने केंद्र और चुनाव आयोग पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री के बयान से पहले तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को उस व्यक्ति की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए जिसने कथित तौर पर SIR और NRC के डर से आत्महत्या की।
अभिषेक बनर्जी ने मृतक प्रदीप कर के परिवार से मुलाकात की और कहा — “एसआईआर की घोषणा के 48 घंटे के भीतर दो लोगों की मौत हो चुकी है। अगर किसी को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए तो वह गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं।”
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
चुनाव आयोग का पक्ष
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को घोषणा की थी कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का दूसरा चरण 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जाएगा। आयोग ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। चुनाव आयोग के मुताबिक, इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और त्रुटियों को दूर करना है ताकि आगामी चुनावों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
शुभेंदु अधिकारी ने ममता के दावे को बताया ‘राजनीतिक ड्रामा’
वहीं, राज्य के विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदीप कर की आत्महत्या का एनआरसी या एसआईआर से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि मृतक का नाम 2002 की मतदाता सूची में था और उन्होंने उसी वर्ष विधानसभा चुनाव में मतदान भी किया था।
अधिकारी ने आरोप लगाया कि — “टीएमसी इस घटना को राजनीतिक लाभ के लिए झूठे नैरेटिव के रूप में पेश कर रही है। जनता 2026 के चुनाव में इसका जवाब देगी।”
राजनीतिक हलचल तेज
चुनाव आयोग की घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। एक तरफ ममता बनर्जी सरकार इसे “मतदाता अधिकारों की रक्षा” का मामला बता रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे “राजनीतिक नाटक” कह रही है।
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