हाईकोर्ट का किसानों को बड़ा तोहफा: भूमि अधिग्रहण का मुआवजा अधिकार है, अनुकंपा नहीं

भूमि अधिग्रहण का मुआवजा देने में चार दशक से की जा रही आनाकानी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण का मुआवजा किसानों का अधिकार है यह अनुकंपा नहीं है। मामला मुरादाबाद जिले से जुड़ा हुआ है। 

Sep 25, 2025 - 14:40
 0  135
हाईकोर्ट का किसानों को बड़ा तोहफा: भूमि अधिग्रहण का मुआवजा अधिकार है, अनुकंपा नहीं

प्रयागराज (आरएनआई) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण का मुआवजा किसानों का अधिकार है, अनुकंपा नहीं। इसके भुगतान में चार दशक तक सरकारी आनाकानी चिंता का विषय है। लिहाजा, अदालत तकनीकी आपत्तियों को किसानों के मौलिक अधिकारों पर हावी नहीं होने देगी। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने करीब चार दशक से मुआवजे की कानूनी लड़ाई लड़ रहे मुरादाबाद के किसानों को बड़ी राहत दी है।

कोर्ट ने वेद प्रकाश सैनी समेत नौ अन्य याचिकाओं पर कृषि उत्पादन मंडी समिति को नई दर पर मुआवजे की रकम किसानों को छह हफ्ते में अदा करने का आदेश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि भुगतान में दोबारा देरी पर वास्तविक भुगतान की तारीख तक 12 फीसदी अतिरिक्त ब्याज अदा करना होगा।

मामला उस जमीन से जुड़ा है जिसे 1977 में बाजार निर्माण के लिए अधिग्रहित किया गया था। उस समय मुआवजा बहुत कम दर पर तय किया गया था। किसान असंतुष्ट थे और उन्होंने वर्षों तक न्याय की लड़ाई लड़ी। 2016 और 2017 में विशेष अदालत ने कुछ किसानों को 108 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके बावजूद किसानों ने आपत्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया।

अंतत: 21 नवंबर 2024 को सुप्रीम आदेश से सभी मामले हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए भेज दिए गए। इसके बाद किसानों ने नई दर पर मुआवजे की मांग की तो यह कहते हुए इन्कार कर दिया गया कि उन्हाेंने आपत्तियां दर्ज कराने में देरी की। हालांकि, कोर्ट ने इस सरकारी दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कहा, तकनीकी या समयसीमा से जुड़ीं आपत्तियों के कारण किसानोंं से उनका हक नहीं छीना जा सकता।

सरकार ने 1977 में अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी, मुरादाबाद ने 1982 में शुरुआती मुआवजा 15.75 प्रति वर्ग गज तय किया था। कुछ मामलों में अदालत ने 1990 में ब्याज सहित मुआवजा 64 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित किया। असंतुष्ट किसानों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने धारा 28-ए, भूमि अधिग्रहण अधिनियम का सहारा लिया जो उन लोगों को राहत देती है जो शुरू में वाद नहीं लड़ पाए। इस प्रावधान के अनुसार यदि एक किसान ने मुआवजा बढ़वाने में सफलता पाई हो तो अन्य किसान भी उसी लाभ के हकदार होंगे।

हाईकोर्ट की टिप्पणियां
1.चार दशक से अधिक समय तक किसानों को उनका उचित मुआवजा नहीं मिल सका। यह स्थिति न केवल न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है, बल्कि राज्य के दायित्वों पर भी प्रश्न खड़ा करती है।

2.भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 28-ए को विशेष रूप से उन किसानों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है जो प्रारंभिक दौर में कानूनी दावा पेश नहीं कर पाते।

3.न्याय की गाड़ी धीमी जरूर चलती है लेकिन अंततः यह सुनिश्चित होना चाहिए कि न्याय केवल किया ही न जाए, बल्कि होते हुए दिखाई भी दे।

कोर्ट ने उम्मीद जताई कि अधिकारी इस आदेश का अक्षरशः और भावनाओं सहित पालन करेंगे,ताकि किसानों को अब और विलंब या उत्पीड़न न झेलना पड़े।

Follow RNI News Channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VaBPp7rK5cD6X

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
RNI News Reportage News International (RNI) is India's growing news website which is an digital platform to news, ideas and content based article. Destination where you can catch latest happenings from all over the globe Enhancing the strength of journalism independent and unbiased.